केंद्र ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव किए

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के दिशा-निर्देशों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों में मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों और गैर-संचारी बीमारियों की जांच को शामिल किया गया है। यह कार्यक्रम बच्चों के स्वास्थ्य की व्यापक देखभाल के लिए डिजिटलीकरण और निरंतरता पर जोर देता है। इसके तहत आंगनवाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध रहेंगी, जिससे सभी बच्चों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके। जानें इस कार्यक्रम के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
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आरबीएसके 2.0 के तहत नई दिशा-निर्देशों की घोषणा

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के दायरे को बढ़ाते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन संशोधित दिशा-निर्देशों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और मधुमेह तथा उच्च रक्तचाप जैसी गैर-संचारी बीमारियों के जोखिम कारकों की जांच को शामिल किया गया है। हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आरबीएसके 2.0 के दिशा-निर्देशों का अनावरण किया, जो बाल स्वास्थ्य जांच के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है।


बच्चों के स्वास्थ्य के लिए व्यापक दृष्टिकोण

एक दशक से अधिक के अनुभव के आधार पर, नए ढांचे में जन्मजात दोष, बीमारियों, कमियों और विकासात्मक देरी के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और जीवनशैली से संबंधित बीमारियों को भी शामिल किया गया है। संशोधित दिशा-निर्देशों में जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए एक व्यापक निवारक, प्रोत्साहक और उपचारात्मक योजना का प्रस्ताव किया गया है, जिसमें डिजिटलीकरण और निरंतर देखभाल पर जोर दिया गया है।


स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार

मंत्रालय के अनुसार, उन्नत जांच ढांचे का उद्देश्य बच्चों और किशोरों में स्वास्थ्य स्थितियों की पहचान और समय पर हस्तक्षेप को सुनिश्चित करना है। इस कार्यक्रम के तहत जांच सेवाएं आंगनवाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में सचल स्वास्थ्य दलों के माध्यम से उपलब्ध रहेंगी, जिससे व्यापक पहुंच और सार्वभौमिक कवरेज सुनिश्चित हो सके।


निगरानी प्रणाली और डिजिटल नवाचार

नए दिशा-निर्देशों का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह समुदाय स्तर पर जांच से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार तक की प्रक्रिया को मजबूत करेगा। इसके लिए एक प्रभावी निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी, ताकि मरीज इलाज बीच में न छोड़ें और उन्हें समय पर आगे की देखभाल मिलती रहे। सरकार के डिजिटल स्वास्थ्य अभियान के तहत आरबीएसके 2.0 में डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड, वास्तविक समय का डेटा प्रणाली और एकीकृत मंच शामिल किए गए हैं। ये डिजिटल नवाचार कार्यक्रम की कार्यक्षमता और जवाबदेही को बढ़ाने में मदद करेंगे।