कृषि मंत्री ने बागवानी बोर्ड की सब्सिडी वापस की, संसद में दी जानकारी

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी ने संसद में बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से मिली सब्सिडी वापस कर दी है। इस संबंध में जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में कई सांसदों को वित्तीय सहायता मिली थी। जानें इस मामले में और क्या जानकारी दी गई है और योजना की पात्रता शर्तें क्या हैं।
 | 
gyanhigyan

कृषि राज्य मंत्री की जानकारी

नई दिल्ली, 28 जुलाई: मंगलवार को सरकार ने संसद में बताया कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी और राजस्थान के भाजपा सांसद लुंबाराम को पिछले पांच वर्षों में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त हुई थी। हालांकि, चौधरी ने यह सब्सिडी वापस कर दी है। कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजनाओं के अंतर्गत योग्य किसानों और उद्यमियों को व्यावसायिक बागवानी, संरक्षित खेती, फसल कटाई के बाद प्रबंधन और शीत भंडारण अवसंरचना के विकास के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है।


मंत्री ने पिछले पांच वर्षों में बोर्ड की योजनाओं से वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले मौजूदा केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और उनके निकटतम परिवार के सदस्यों की जानकारी भी साझा की। सूची के अनुसार, सिरोही से भाजपा सांसद लुंबाराम को वर्ष 2025 में और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी को वर्ष 2026 में यह सहायता मिली। ठाकुर ने कहा, “भगीरथ चौधरी ने सूचित किया है कि उन्होंने योजना के तहत प्राप्त सब्सिडी संबंधित बैंक को वापस कर दी है।”


मंत्री ने यह भी बताया कि संबंधित बैंक को सब्सिडी की राशि बागवानी बोर्ड को लौटाने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड योजना के दिशानिर्देशों में लोक सेवकों या उनके परिवार के सदस्यों द्वारा दिए गए आवेदनों के संबंध में हितों के टकराव या खुद को प्रक्रिया से अलग करने का कोई विशेष प्रावधान नहीं है। ठाकुर लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी के सवाल का उत्तर दे रहे थे, जिन्होंने पूछा था कि क्या पिछले पांच वर्षों में किसी मौजूदा केंद्रीय मंत्री, सांसद या उनके करीबी परिवार के सदस्यों को इन योजनाओं के तहत सब्सिडी मिली है।


मंत्री ने बताया कि ये योजनाएं सभी योग्य आवेदकों के लिए उपलब्ध हैं, जिनमें व्यक्तिगत आवेदक, साझेदारी फर्म, कंपनियां, सहकारी संस्थाएं और अन्य वैध संस्थाएं शामिल हैं। इसके लिए निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत परियोजना की भूमि आवेदक के स्वामित्व में होनी चाहिए या कम से कम 10 वर्षों के लिए पट्टे पर ली गई होनी चाहिए और इसका रिकॉर्ड राजस्व अभिलेखों में दर्ज होना चाहिए।