कुवैत में ईरान की घुसपैठ: तनाव और संघर्ष की नई लहर
कुवैत में ईरान की घुसपैठ का आरोप
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कुवैत ने आरोप लगाया है कि ईरान की सैन्य ताकत उनके क्षेत्र में घुसपैठ कर रही है। कुवैत सरकार का कहना है कि ईरान ने उनके एक द्वीप पर आक्रमण करने की कोशिश की है। इस दौरान ईरानी और कुवैती सेना के बीच गोलीबारी की घटनाएं भी सामने आई हैं। कुवैत का दावा है कि आईआरजीसी से जुड़े सैनिक उनके नियंत्रण वाले बूबियन द्वीप पर ग्राउंड ऑपरेशन करने का प्रयास कर रहे हैं। यह आरोप उस समय लगाया गया है जब ईरान और कुवैत के बीच पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है।
कुवैत का बूबियन द्वीप फारस की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम में स्थित है और इसे कुवैत का सबसे बड़ा द्वीप माना जाता है। यह द्वीप अमेरिका के लिए एक अस्थायी सैन्य ठिकाना भी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने यूएई, कुवैत और बहरीन पर ध्यान केंद्रित किया है, जो अमेरिका और इजरायल के करीबी सहयोगी माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष यह तय करेगा कि ईरान क्षेत्र में अपनी स्थिति बनाए रखता है या अमेरिका और इजरायल का प्रभाव बना रहता है।
ईरान की परमाणु धमकी
ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर फिर से सैन्य हमला किया गया, तो वह अपने यूरेनियम संवर्धन की दर को 90% तक बढ़ा देगा। यह संकट तब शुरू हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दिए गए प्रस्तावों को ईरान ने ठुकरा दिया। ईरान का कहना है कि ये प्रस्ताव उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं।
ईरानी संसद के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान की सुरक्षा को खतरा होता है, तो वह यूरेनियम संवर्धन को 90% तक बढ़ाने पर विचार करेगा। यह स्तर परमाणु हथियार बनाने के लिए आवश्यक माना जाता है। ईरान का यह कदम दर्शाता है कि वह अब अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु क्षमता को अंतिम उपाय के रूप में देख रहा है।
