कुमार विश्वास ने कॉमेडी की आजादी पर उठाए सवाल

कुमार विश्वास ने हाल ही में कॉमेडी में सहनशीलता की कमी पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि कैसे पुरानी सरकारों में उन्हें खुलकर बोलने की आजादी थी, जबकि आज के समय में लोग संवेदनशील हो गए हैं। उन्होंने कॉमेडियन्स पर कानूनी कार्रवाई के मामलों का भी जिक्र किया और कहा कि समाज में ह्यूमर की सहनशीलता खत्म हो रही है। जानें उनके विचार और अनुभव इस लेख में।
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कॉमेडी में सहनशीलता की कमी

भारतीय कवि और गीतकार कुमार विश्वास ने हाल ही में कॉमेडी में सहनशीलता के खत्म होने पर चिंता जताई है। उन्होंने पुरानी सरकारों की सराहना की, जब उन्हें कॉमेडी करने की पूरी स्वतंत्रता थी। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें भी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था और उनके खिलाफ एफ आई आर भी दर्ज हुई थी।


कॉमेडी की आजादी

एक साक्षात्कार में कुमार विश्वास ने कहा कि 'एक समय ऐसा था जब उनके खिलाफ 87 एफ आई आर दर्ज हुई थीं। उनके शो में कई ऐसे मुद्दे उठाए गए थे, जिनके लिए उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा। फिर भी, उस समय कॉमेडी में सहनशीलता थी। अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के शासन में उन्हें खुलकर बोलने की आजादी थी। उस समय जोक्स के लिए कोई कुछ नहीं कहता था। 20 साल पहले वे नेताओं, नीतियों, और जेंडर पर खुलकर मजाक करते थे।'


आज की स्थिति

'अब वह आजादी नहीं रही। लोग अब बहुत संवेदनशील हो गए हैं। आप किसी मुद्दे पर बात नहीं कर सकते। यदि आप सरकार के खिलाफ कुछ कहेंगे, तो लोग आपको गालियाँ देने लगेंगे। जाति, धर्म, रंग, भाषा, या किसी भी प्रकार के जोक्स पर बात करना अब मुश्किल हो गया है। छोटी-छोटी बातों पर लोगों की भावनाएँ आहत हो जाती हैं।' उन्होंने कहा।


कॉमेडियन्स पर कानूनी कार्रवाई

कुमार विश्वास ने यह भी बताया कि कॉमेडियन्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कोई नई बात नहीं है। मुनव्वर फारुकी, वीर दास, और कुणाल कामरा जैसे कई कॉमेडियन्स पहले भी अपने आपत्तिजनक और सरकार विरोधी जोक्स के लिए एफ आई आर का सामना कर चुके हैं।


समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया

कुमार विश्वास ने समय रैना की विवादास्पद स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'आजकल के युवा इतने समझदार नहीं हैं। उन्हें समझाया जा सकता है। 150 एफ आई आर दर्ज करने की आवश्यकता नहीं थी। जिस समाज में ह्यूमर की सहनशीलता खत्म हो जाती है, वह समाज धीरे-धीरे मरने लगता है।'