किश्तवाड़ में ऑपरेशन त्राशी-1: टॉयसन की बहादुरी से मिली आतंकवाद विरोधी सफलता

किश्तवाड़ के छतरू क्षेत्र में ऑपरेशन त्राशी-1 के दौरान भारतीय सेना और सुरक्षा बलों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की। इस अभियान में टॉयसन नामक एक स्थानीय कुत्ते ने अद्वितीय साहस का परिचय देते हुए आतंकियों के ठिकाने तक पहुंचकर सुरक्षा बलों को महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई। गोली लगने के बावजूद, टॉयसन ने मिशन से पीछे नहीं हटते हुए आतंकियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई में मदद की। इस अभियान ने भारतीय सुरक्षा बलों की रणनीति और साहस को एक बार फिर साबित किया है।
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किश्तवाड़ में ऑपरेशन त्राशी-1: टॉयसन की बहादुरी से मिली आतंकवाद विरोधी सफलता

किश्तवाड़ में ऑपरेशन त्राशी-1 की सफलता

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छतरू क्षेत्र में चलाए गए बहुस्तरीय आतंकवाद विरोधी अभियान, जिसे ऑपरेशन त्राशी-1 कहा जाता है, में भारतीय सेना और सुरक्षा बलों ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इस अभियान की सबसे प्रेरणादायक कहानी टॉयसन नामक एक स्थानीय कुत्ते की है, जिसने गोली लगने के बावजूद अद्वितीय साहस का परिचय देते हुए आतंकियों के ठिकाने तक सबसे पहले पहुंचकर सुरक्षा बलों को महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई।


टॉयसन की बहादुरी

सूत्रों के अनुसार, टॉयसन को भारतीय सेना ने आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षित किया है। जब छतरू क्षेत्र में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली, तो उसे आगे भेजा गया। यह मूक योद्धा दुर्गम चट्टानी ढलानों को पार करते हुए ठिकाने तक पहुंचा। उसकी आहट सुनकर आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें टॉयसन के पैर में गोली लग गई।


सुरक्षा बलों की कार्रवाई

गोली लगने के बावजूद, टॉयसन ने मिशन से पीछे नहीं हटते हुए सबसे पहले ढोक के पास पहुंचकर सुरक्षा बलों को ठिकाने तक सुरक्षित पहुंचने में मदद की। इसके बाद सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों को मार गिराया। घायल टॉयसन को बाद में हवाई मार्ग से इलाज के लिए भेजा गया, और वर्तमान में वह उधमपुर में है, जहां उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।


ऑपरेशन त्राशी-1 का विवरण

यह पूरा अभियान ऑपरेशन त्राशी-1 के नाम से जाना जाता है, जिसमें सेना की काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स डेल्टा, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त भागीदारी रही। अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान कई महीनों की योजना और समन्वित रणनीति का परिणाम था।


आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई

जम्मू में आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में जम्मू के आईजीपी बीएस टूटी ने बताया कि इस अभियान की पृष्ठभूमि वर्ष 2024 में बनी, जब इजरायल ग्रुप नामक आतंकी संगठन के सात कट्टर आतंकी भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर आए थे। डेढ़ वर्ष की अवधि में इन आतंकियों के साथ 17 बार मुठभेड़ हुई। हालिया कार्रवाई इस लंबे अभियान का निर्णायक चरण था, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर सैफुल्ला को मार गिराया गया।


सुरक्षा बलों की रणनीति

काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स डेल्टा के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल एपीएस बल ने ऑपरेशन त्राशी-1 को धैर्य, स्पष्ट सोच और हर स्तर पर निर्बाध समन्वय का आदर्श उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में सभी स्तरों पर तालमेल रहा, जिसमें जमीन पर तैनात जवानों से लेकर कोर कमांडर तक शामिल थे।


भौगोलिक चुनौतियाँ

मेजर जनरल एपीएस बल ने बताया कि यह अभियान 14 जनवरी को किश्तवाड़ में शुरू हुआ। 18 जनवरी को पहली बार आतंकियों के ठिकाने का पता चला। इसके बाद कई बार मुठभेड़ हुई। जवानों को बर्फबारी, बारिश और भूस्खलन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।


अभियान की सफलता

इस पूरे अभियान में सेना को कोई मानवीय क्षति नहीं हुई, सिवाय बहादुर टॉयसन के घायल होने के। तलाशी अभियान के दौरान तीन एके 47 राइफल सहित युद्ध जैसे साजो सामान और मारे गए आतंकियों के शव बरामद किए गए हैं। ऑपरेशन त्राशी-1 ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सुरक्षा बल आतंकवाद के खिलाफ पूरी तैयारी और साहस के साथ डटे हैं।