किडनी स्वास्थ्य: 14 करोड़ भारतीयों पर प्रभाव और KFT की आवश्यकता

किडनी स्वास्थ्य पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है, खासकर जब भारत में 14 करोड़ लोग क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से प्रभावित हैं। KFT, या किडनी फंक्शन टेस्ट, किडनी की कार्यक्षमता का मूल्यांकन करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। यह जानना जरूरी है कि किसे नियमित जांच करानी चाहिए और किडनी रोग के लक्षण क्या हो सकते हैं। इस लेख में, हम किडनी स्वास्थ्य के लिए आवश्यक जानकारी और KFT के महत्व पर चर्चा करेंगे।
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किडनी का महत्व और स्वास्थ्य जांच


किडनी मानव शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो रक्त को साफ करने, अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त तरल को बाहर निकालने में मदद करती है। यह कई आवश्यक रासायनिक संतुलनों को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किडनी की बीमारियों के प्रारंभिक चरण में लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए समय पर जांच कराना आवश्यक है।


भारत में किडनी रोग का बढ़ता बोझ

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 14 करोड़ भारतीय CKD से प्रभावित हैं। हालांकि, यह आंकड़ा विभिन्न अध्ययनों और जनसंख्या के आधार पर भिन्न हो सकता है।


KFT क्या है?

KFT, या किडनी फंक्शन टेस्ट, एक सामान्य परीक्षण है जो रक्त और कभी-कभी मूत्र के माध्यम से किडनी की कार्यक्षमता का मूल्यांकन करता है। इसमें आमतौर पर सीरम क्रिएटिनिन, यूरिया और eGFR जैसे पैरामीटर शामिल होते हैं। डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार अन्य परीक्षण भी करवा सकते हैं।


किसे KFT कराना चाहिए?

हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए साल में दो बार KFT कराना आवश्यक नहीं है। लेकिन, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, पूर्व किडनी समस्याएं, या परिवार में CKD का इतिहास रखने वाले लोगों को नियमित जांच की सलाह दी जाती है।


किडनी रोग के लक्षण

CKD के प्रारंभिक चरण में लक्षण प्रकट नहीं होते। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, पैरों या चेहरे में सूजन, पेशाब में परिवर्तन, थकान, भूख में कमी, मितली, और सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।


किडनी की नियमित निगरानी

डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, और किडनी रोग के इतिहास वाले लोगों को नियमित रूप से किडनी की जांच करानी चाहिए। डॉक्टर क्रिएटिनिन और eGFR के साथ यूरिन में प्रोटीन की जांच भी करवा सकते हैं।


KFT रिपोर्ट में ध्यान देने योग्य बातें

KFT रिपोर्ट में सीरम क्रिएटिनिन, eGFR, और यूरिया जैसे पैरामीटर महत्वपूर्ण होते हैं। इनका स्तर किडनी की कार्यक्षमता को दर्शाता है।


किडनी को स्वस्थ रखने के उपाय

किडनी की सेहत के लिए रक्तचाप और रक्त शुगर को नियंत्रित रखना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, और धूम्रपान से बचना आवश्यक है।


डॉक्टर से कब संपर्क करें?

यदि KFT रिपोर्ट में क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ा हुआ है, eGFR कम है, या पेशाब में लगातार प्रोटीन या खून पाया जाता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।