कालबैशाखी: मौसम में बदलाव और उसके प्रभाव

अप्रैल और मई के महीनों में मौसम में बदलाव के दौरान कालबैशाखी का कहर देखने को मिलता है। यह तूफानी हवाएं भारत के कुछ हिस्सों और बांग्लादेश में भारी बारिश और ओले लाती हैं। जानें कैसे यह मौसम का रूप बदलता है और इसके कारण होने वाले नुकसान के बारे में। हाल ही में कोलकाता और ओडिशा में इसकी दस्तक देखी गई है।
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कालबैशाखी: मौसम में बदलाव और उसके प्रभाव gyanhigyan

कालबैशाखी का परिचय

अप्रैल के अंत और मई में मौसम में कई परिवर्तन देखने को मिलते हैं। उत्तर भारत में कभी तेज धूप तो कभी भारी बारिश और ओले गिरने की घटनाएं हो रही हैं। केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के कई अन्य देशों में भी मौसम में अचानक बदलाव ने लोगों को चौंका दिया है। यूरोप के ग्रीस और तुर्की जैसे देशों में भीषण ठंड से स्थिति गंभीर है। यहां ठंडी हवाएं चल रही हैं और कहीं बर्फबारी भी हो रही है। इन सबके बीच, भारत के कुछ राज्यों में मौसम का विकराल रूप देखने को मिल सकता है।


कालबैशाखी का कहर

आने वाले समय में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पड़ोसी देश बांग्लादेश में कालबैशाखी का कहर देखने को मिल सकता है। यह कोई नई घटना नहीं है, हर साल यह संकट अप्रैल और मई में आता है। हालांकि, कालबैशाखी से गर्मी से राहत मिलती है, लेकिन इसके साथ ही तूफानी हवाओं के कारण भारी तबाही भी होती है। हाल ही में इसकी दस्तक कोलकाता और ओडिशा में देखी गई है।


कालबैशाखी का मौसम पर प्रभाव

रिपोर्टों के अनुसार, हाल के समय में मौसम ने कई देशों में बदलाव किया है। उत्तरपूर्वी भारत और बांग्लादेश पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है। भारत और बांग्लादेश में भीषण आंधीतूफान की आशंका जताई जा रही है। कोलकाता और ओडिशा में पहले ही आंधीतूफान के लिए गंभीर चेतावनी जारी की जा चुकी है।


कालबैशाखी की विशेषताएँ

सामान्यतः, कालबैशाखी एक प्रीमानसून तूफान है जो अप्रैल और मई में भारत के कुछ हिस्सों और बांग्लादेश में आता है। इसे बंगाली बैशाखी महीने के कारण कालबैशाखी कहा जाता है। यह पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बांग्लादेश में भारी बारिश, तेज हवाएं और ओले लाता है। हालांकि, यह गर्मियों में राहत देता है, लेकिन इससे खेती और अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान होता है। हाल के दिनों में ओडिशा में कालबैशाखी ने भारी नुकसान पहुंचाया है।


कालबैशाखी का निर्माण

तूफानी हवाएं आमतौर पर छोटा नागपुर पठार से उत्पन्न होती हैं। यह तब होती हैं जब गर्म सूखी हवा और बंगाल की खाड़ी की नमी वाली हवाएं मिलती हैं। मानसून के आगमन से पहले, यह पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, असम और झारखंड जैसे राज्यों में कहर बरपाती हैं। कालबैशाखी की तेज हवाओं के कारण सैकड़ों पेड़ उखड़ जाते हैं और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचता है।


ओलों की संभावना

हाल ही में भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार और बुधवार को 50 मिमी से अधिक बारिश की संभावना जताई है। यदि ऐसा होता है, तो दिनभर में 100 मिमी से अधिक बारिश हो सकती है। इस दौरान ओले गिरने, तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने के अन्य खतरे भी हैं।