कानपुर में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, 125 करोड़ की धोखाधड़ी में 8 गिरफ्तार

कानपुर में पुलिस ने एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने डिजिटल गिरफ्तारी और निवेश के नाम पर 125 करोड़ रुपये की ठगी की। इस गिरोह के 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कई बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं। गिरोह ने फर्जी खातों का इस्तेमाल कर लोगों को धोखा दिया। पुलिस ने इस मामले में कई संदिग्ध लेनदेन के सबूत भी जुटाए हैं। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।
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कानपुर में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, 125 करोड़ की धोखाधड़ी में 8 गिरफ्तार gyanhigyan

कानपुर में साइबर अपराध का भंडाफोड़

कानपुर साइबर धोखाधड़ी: उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने डिजिटल गिरफ्तारी और निवेश के नाम पर देशभर से लगभग 125 करोड़ रुपये की ठगी की थी। इस गिरोह के मास्टरमाइंड सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले में कई प्रमुख बैंकों के कर्मचारी भी शामिल थे, जो कमीशन के लालच में फर्जी खातों का संचालन कर रहे थे।


कानपुर में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, 125 करोड़ की धोखाधड़ी में 8 गिरफ्तार


कानपुर पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान के दौरान थाना बर्रा पुलिस को सूचना मिली कि एच ब्लॉक पेट्रोल पंप के पास कुछ संदिग्ध लोग किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीन संदिग्ध व्यक्तियों को पकड़ लिया। उनसे पूछताछ के दौरान साइबर धोखाधड़ी के कई राज़ सामने आए।


गिरोह के 8 सदस्य गिरफ्तार

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों में सोनू शर्मा, सतीश पांडेय, साहिल विश्वकर्मा, धर्मेंद्र सिंह, तनिष गुप्ता, अमित सिंह, अमित कुमार और आशीष कुमार शामिल हैं। पूछताछ में यह पता चला कि यह गिरोह चार चरणों में ठगी की घटनाओं को अंजाम देता था।



  • बैंकों में घुसपैठ: आरोपियों ने यूपी ग्रामीण बैंक, जम्मूकश्मीर बैंक, एक्सिस बैंक और यूको बैंक के भ्रष्ट कर्मचारियों को 5 से 10 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर अपने साथ मिलाया।

  • फर्जी ट्रस्ट और करंट अकाउंट: बैंक कर्मियों की मदद से फर्जी दस्तावेजों पर ऐसे खाते खोले जाते थे, जिनमें लेनदेन की कोई सीमा नहीं होती थी।

  • डिजिटल गिरफ्तारी का डर: गिरोह लोगों को ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ या उच्च रिटर्न वाले निवेश का झांसा देकर इन खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर करवाता था।

  • सबूत मिटाना: जब भी किसी खाते की शिकायत साइबर सेल में होती, बैंक के अंदर मौजूद साथी तुरंत पूरी रकम निकाल लेते और खाता बंद करवा देते थे, जिससे पुलिस को ‘मनी ट्रेल’ नहीं मिल पाती थी।


धोखाधड़ी के सबूत मिले

प्रारंभिक जांच में पुलिस को दो मुख्य बैंक खातों से 53 करोड़ और 66 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन के सबूत मिले हैं। इसके अलावा एक अन्य खाते से 5 करोड़ का ट्रांजेक्शन भी पाया गया है। नवी मुंबई में इसी गिरोह द्वारा 58 करोड़ रुपये की ठगी का लिंक भी मिला है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 9 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें धोखाधड़ी के डेटा और बैंक कर्मियों के साथ बातचीत के सबूत मौजूद हैं। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने कहा कि मामले में शामिल बैंक अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।