कानपुर में फर्जी डिग्री रैकेट का भंडाफोड़: 25 हजार के इनामी आरोपी की गिरफ्तारी
कानपुर में फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा
यूपी के कानपुर में पुलिस ने एक गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की है, जो फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाकर पूरे देश में सप्लाई कर रहा था। इस सिलसिले में, मयंक भारद्वाज नामक एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर 25 हजार रुपये का इनाम था। मयंक को इम्फाल स्थित एशियन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी का काउंसलर बताया जा रहा है और उसकी भूमिका इस फर्जी डिग्री नेटवर्क में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उसे गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र से पकड़ा गया और बाद में कोर्ट में पेश कर दिया गया।
फर्जी डिग्रियों का वितरण
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि मयंक का नाम शैलेंद्र कुमार ओझा से पूछताछ के दौरान सामने आया, जो इस फर्जी डिग्री नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड है। जांच में यह पता चला है कि शैलेंद्र ओझा ने मयंक के माध्यम से 105 छात्रों का दाखिला कराया था, जिन्हें बाद में मोटी रकम लेकर फर्जी डिग्रियां दी गईं।
58 लाख रुपये का लेनदेन
मयंक के मोबाइल फोन की जांच में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। पुलिस ने उसके पास से सात फर्जी डिग्रियां और प्रमाणपत्र बरामद किए हैं। इसके अलावा, उसके बैंक खाते में पिछले तीन वर्षों में लगभग 58 लाख रुपये के लेनदेन का पता चला है। पुलिस अब इस रकम के स्रोत और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है।
यूनिवर्सिटी की वैधता पर सवाल
पुलिस के अनुसार, एशियन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की यूजीसी से संबद्धता भी जांच के दायरे में है। आरोपी ने इस यूनिवर्सिटी के यूजीसी से मान्यता प्राप्त होने का दावा किया है, लेकिन पुलिस को इस संबंध में कई विसंगतियां मिली हैं।
फर्जी डिग्री रैकेट का विस्तार
जांच में यह भी सामने आया है कि शैलेंद्र ओझा और मयंक भारद्वाज की पहचान 2023 में सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। दोनों के बीच डिजिटल और बैंकिंग लेनदेन के प्रमाण मिले हैं। पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है, जिसमें छात्रों की भर्ती, काउंसलिंग और डिग्रियों का निर्माण करने के लिए विभिन्न लोगों की जिम्मेदारियां तय की गई थीं।
विभिन्न डिग्रियों की पेशकश
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह हाईस्कूल से लेकर बीटेक, एलएलबी, डीफार्मा, बीफार्मा जैसी विभिन्न शैक्षणिक और प्रोफेशनल डिग्रियां 50 हजार रुपये से लेकर ढाई लाख रुपये तक में उपलब्ध कराता था। यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, सिक्किम, कर्नाटक और मणिपुर जैसे कई राज्यों में फैला हुआ है।
पुलिस की कार्रवाई जारी
फरवरी में किदवई नगर क्षेत्र में हुई छापेमारी के दौरान इस बड़े फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा हुआ था। अब तक इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है और जल्द ही और बड़े खुलासे किए जाएंगे।
