कानपुर में पिता द्वारा जुड़वा बेटियों की हत्या: एक त्रासदी की कहानी

कानपुर में एक दवा कारोबारी द्वारा अपनी 11 साल की जुड़वा बेटियों की हत्या ने सभी को स्तब्ध कर दिया है। यह घटना एक ऐसे रिश्ते की कहानी है, जो प्यार से शुरू हुआ था लेकिन अंत में त्रासदी में बदल गया। शशिरंजन मिश्र और रेशमा छेत्री की प्रेम कहानी अब एक दुखद अध्याय बन गई है। जानिए कैसे एक पिता ने अपनी बेटियों के साथ ऐसा किया और इसके पीछे के कारण क्या थे।
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प्यार से शुरू हुआ एक दुखद सफर

कानपुर में शशिरंजन मिश्र और रेशमा छेत्री के बीच 12 साल पहले पहली नजर का प्यार हुआ था। परिवार की सहमति के बिना उन्होंने शादी की, लेकिन समय के साथ उनके रिश्ते में दरार आ गई। पति-पत्नी के बीच इतनी दूरी बढ़ गई कि वे एक-दूसरे के कमरे में भी नहीं जाते थे। शशिरंजन जुड़वा बेटियों के साथ एक कमरे में सोता था, जबकि रेशमा अपने छोटे बेटे के साथ दूसरे कमरे में रहती थी।


दुखद घटना की जानकारी

रविवार तड़के कानपुर से एक दवा कारोबारी द्वारा अपनी 11 साल की जुड़वा बेटियों की हत्या की खबर ने सभी को चौंका दिया। लोग जानना चाहते हैं कि एक पिता इतनी क्रूरता कैसे कर सकता है। कुछ लोग उसे मानसिक रोगी मानते हैं, जबकि अन्य उसे नशे का आदी बताते हैं। इस घटना के बाद रेशमा ने अपने पति के लिए फांसी की सजा की मांग की है।


रिश्तों में आई दरार

शशिरंजन और रेशमा के बीच प्यार की शुरुआत के बाद सब कुछ ठीक नहीं रहा। समय के साथ झगड़े बढ़ने लगे और विश्वास टूट गया। दोनों ने एक ही छत के नीचे एकाकी जीवन बिताना शुरू कर दिया। रेशमा ने बताया कि शशिरंजन नशे का आदी हो गया था और अक्सर मारपीट करता था।


बेटियों की सुरक्षा की चिंता

रेशमा ने अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और सीसीटीवी कैमरे से उनकी निगरानी करती थी। शनिवार रात भी वह इसी काम में व्यस्त थी। जब उसने देखा कि शशिरंजन अपनी बेटियों को टॉयलेट ले जा रहा है, तो उसे कुछ संदेह हुआ। लेकिन जब वह अपने कमरे में वापस आई, तो पुलिस ने दरवाजा खटखटाया और दोनों बेटियों की लाशें पड़ी मिलीं।


हत्या का कारण

पुलिस ने शशिरंजन से पूछताछ की, जिसमें उसने कहा कि उसकी बेटियों की देखभाल कौन करेगा, इसी कारण उसने उन्हें मार दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उसने पहले बेटियों का गला दबाया और फिर चापड़ से वार करके उनकी सांस नली को क्षति पहुंचाई।


विशेषज्ञों की राय

मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक नींद की गोलियों का सेवन करने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर बड़ा कदम उठा सकता है।