कानपुर के वकील प्रियांशु का सुसाइड नोट: परिवार के दबाव से टूटने की कहानी

कानपुर के 23 वर्षीय वकील प्रियांशु श्रीवास्तव ने अपने सुसाइड नोट में परिवार के दबाव और मानसिक यातनाओं का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे बचपन से ही उन्हें सख्त रवैये का सामना करना पड़ा और किस तरह से यह उनके जीवन को प्रभावित करता रहा। प्रियांशु ने अपने माता-पिता से अपील की है कि वे बच्चों पर उतनी ही सख्ती करें जितनी वे सहन कर सकें। उनकी कहानी एक गंभीर सामाजिक मुद्दे की ओर इशारा करती है, जो मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक दबाव के प्रभाव को उजागर करती है।
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कानपुर के वकील प्रियांशु का सुसाइड नोट: परिवार के दबाव से टूटने की कहानी gyanhigyan

प्रियांशु का सुसाइड नोट

कानपुर के वकील प्रियांशु का सुसाइड नोट: परिवार के दबाव से टूटने की कहानी


मैं प्रियांशु श्रीवास्तव, 23 साल का एक प्रशिक्षु अधिवक्ता, कानपुर का निवासी हूं। आज 23 अप्रैल को, मैंने अपनी जान देने का निर्णय लिया है और यह सुसाइड नोट लिखने का मेरा अंतिम इरादा है।


मेरी कहानी बचपन से शुरू होती है, जब मैंने मानसिक यातनाओं का सामना करना शुरू किया। 6 साल की उम्र में, मैंने बिना अनुमति के फ्रिज से आम का जूस पी लिया, जिसके बाद मुझे निर्वस्त्र करके घर से बाहर निकाल दिया गया।


मेरे पिता की सख्ती ने मुझे हमेशा घुटन महसूस कराई। पढ़ाई के दौरान उन पर दबाव डालना और हर समय निगरानी रखना मानसिक टॉर्चर था।


कक्षा 9 में प्रवेश के समय, मेरे पिता ने मुझे एक विषय चुनने के लिए मजबूर किया, जिसमें मेरी रुचि नहीं थी। इसके परिणामस्वरूप, मैंने अच्छे अंक नहीं प्राप्त किए।


छोटी उम्र में की गई छोटी-छोटी गलतियों के लिए मुझे आज भी अपमानित किया जाता है। मैंने अपने खर्चों के लिए ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया, लेकिन इसके बावजूद मेरे पिता ने मुझे अपशब्द कहकर जलील किया।


मैंने उनके कचहरी के काम में मदद की, लेकिन इसके बावजूद मुझे हमेशा अपमानित किया गया। आज मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं क्योंकि मैं इस घुटन भरी जिंदगी को और नहीं सहन कर सकता।


मैं अपने माता-पिता से अपील करता हूं कि वे बच्चों पर उतनी ही सख्ती करें जितनी वे सहन कर सकें। मेरी लाश को मेरे पिता छू भी न पाएं।


लव यू मम्मी और बहन।


I Quit Priyanshu