कानपुर की महिला पुलिसकर्मियों की प्रेरणादायक मातृत्व कहानी
मां का प्यार और ड्यूटी का फर्ज
कहते हैं कि मां के कदमों में स्वर्ग होता है। एक मां अपने बच्चे को जन्म देने से लेकर उसकी परवरिश तक हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाती है। लेकिन जब वह नौकरीपेशा होती है और वर्दी की जिम्मेदारी भी उठाती है, तो उसका संघर्ष कई गुना बढ़ जाता है। मदर्स डे के अवसर पर आइए जानते हैं कानपुर के महिला थाने की एक ऐसी कहानी, जहां महिला पुलिसकर्मी अपने बच्चों की परवरिश के साथ-साथ ड्यूटी भी बखूबी निभा रही हैं.
महिला थाने में मां की ममता
कानपुर महिला थाने में रोजाना एक ऐसा दृश्य देखने को मिलता है, जो मां की ममता और कर्तव्य का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत करता है। यहां कई महिला पुलिसकर्मी हैं, जिनके छोटे बच्चे हैं। घर पर बच्चों की देखभाल करने वाला कोई नहीं होने के कारण, वे अपने बच्चों को साथ लेकर थाने आती हैं। जब ड्यूटी के दौरान बच्चा रोता है, तो मां उसे गोद में लेकर चुप कराती हैं और फिर अपनी जिम्मेदारियों में जुट जाती हैं.
जुड़वा बच्चों के साथ ड्यूटी करती नेहा
महिला पुलिसकर्मी नेहा के दो छोटे जुड़वा बच्चे हैं। वे बताती हैं कि घर पर बच्चों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है, इसलिए उन्हें अपने बच्चों को साथ लाना पड़ता है। उनका कहना है कि महिलाएं हर परिस्थिति में खुद को मजबूत बनाकर ड्यूटी और बच्चों की जिम्मेदारी दोनों संभाल लेती हैं.
ड्यूटी और मातृत्व का संतुलन
महिला पुलिसकर्मी दीक्षा का कहना है कि थाने के वरिष्ठ अधिकारी और साथी कर्मचारी काफी सहयोग करते हैं, जिससे काम और बच्चों की देखभाल दोनों करना आसान हो जाता है। थाने में कार्यरत आरती और आराधना भी अपने बच्चों को साथ लेकर ड्यूटी करती हैं और मां होने का फर्ज निभाते हुए पुलिस सेवा में पूरी निष्ठा से जुटी रहती हैं.
महिला पुलिसकर्मियों का समर्थन
एडीसीपी शिवा सिंह ने बताया कि महिला पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के साथ बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग उनकी छुट्टियों और ड्यूटी को लेकर विशेष सहयोग करता है। उन्होंने कहा कि मां ही वह शक्ति है जो परिवार और नौकरी दोनों जिम्मेदारियों को एक साथ संभाल सकती है.
