कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने महिला आरक्षण बिल पर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने महिला आरक्षण बिल पर अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट करते हुए आरोप लगाया कि इसके पीछे परिसीमन बिल लाने की योजना है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस इस बिल का विरोध करेगी और पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी से सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया है। 17 अप्रैल को लोकसभा में इस विधेयक को पारित नहीं किया जा सका, और अब सरकार इसे मानसून सत्र में फिर से पेश करने की योजना बना रही है।
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महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस का स्पष्ट रुख

कांग्रेस के सांसद प्रमोद तिवारी ने शुक्रवार को महिला आरक्षण बिल के संबंध में अपनी पार्टी की स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल के पीछे परिसीमन बिल लाने की योजना है। तिवारी ने बताया कि कांग्रेस इस परिसीमन बिल का विरोध करने का इरादा रखती है और पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया है।


सर्वदलीय बैठक की मांग

तिवारी ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि उन्होंने परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया है। पहले भी ऐसा पत्र भेजा गया था और अब फिर से भेजा गया है। उन्होंने कहा कि यदि महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन लाया जाता है, तो कांग्रेस इसका विरोध करेगी। गुरुवार को, खड़गे ने राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी से संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया।


महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक

महिलाओं के लिए विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण और लोकसभा में परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक 17 अप्रैल को निचले सदन में पारित नहीं हो सका। इसे 298 मत मिले जबकि विपक्ष में 230 मत पड़े, जो संविधान के अनुसार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से कम थे। ऐसी अटकलें हैं कि सरकार मानसून सत्र में इस विधेयक को फिर से पेश करने की योजना बना रही है, लेकिन खड़गे ने संसद में पेश करने से पहले विधेयक की जांच के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता पर जोर दिया।


खड़गे का पत्र

खड़गे ने पीएम मोदी को लिखे अपने पत्र में कहा कि उन्होंने मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान संसदीय कार्य मंत्री को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था। दुर्भाग्यवश, इन अनुरोधों को स्वीकार नहीं किया गया। इसके परिणामस्वरूप, 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 आवश्यक 2/3 बहुमत हासिल करने में विफल रहा।


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