कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भाजपा सरकार पर व्यापार समझौते में चूक का आरोप लगाया
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भाजपा सरकार पर व्यापार समझौते में चूक का आरोप लगाया है। उन्होंने अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि नेतृत्व स्तर पर संवाद की कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। रमेश ने सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट भी साझा की, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार की विदेश नीति पर कटाक्ष किया। लटनिक ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ट्रंप को फोन न करने के कारण व्यापार समझौता नहीं हो सका। इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए लटनिक ने व्यापार वार्ता की रणनीति को भी समझाया।
| Jan 9, 2026, 12:17 IST
कांग्रेस सांसद का हमला
कांग्रेस के सांसद जयराम रमेश ने शुक्रवार को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर हमला करते हुए अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के बयानों को साझा किया। लटनिक ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते में कमी का कारण नेतृत्व स्तर पर संवाद की कमी है। उन्होंने लटनिक के पॉडकास्ट क्लिप के साथ एक व्यंग्यात्मक हिंदी श्लोक साझा किया, जिससे भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव का संकेत मिलता है।
रमेश की टिप्पणी
रमेश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, "हग हग ना रहा, पोस्ट पोस्ट ना रहा, क्या से क्या हो गया बेवफा तेरे दोस्ती में।" यह टिप्पणी लटनिक के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो सका क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। गुरुवार को 'ऑल-इन पॉडकास्ट' में लटनिक ने कहा कि अनुबंधों पर बातचीत हो चुकी थी, लेकिन अंतिम चरण में नेतृत्व स्तर की भागीदारी आवश्यक थी।
लटनिक का बयान
लटनिक ने कहा, "मैं अनुबंधों पर बातचीत करता और पूरे सौदे को तैयार करता, लेकिन यह ट्रंप का सौदा है। अंतिम निर्णय वही लेते हैं। सब कुछ तैयार है, आपको मोदी से बात करनी होगी, राष्ट्रपति को फोन करना होगा। वे ऐसा करने में असहज थे। इसलिए मोदी ने फोन नहीं किया।" उन्होंने यह भी बताया कि उसी शुक्रवार को, अगले सप्ताह इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ सौदे किए गए थे।
व्यापार वार्ता की रणनीति
लटनिक ने ट्रंप की व्यापार वार्ता रणनीति को "सीढ़ीनुमा" मॉडल के रूप में वर्णित किया। उनके अनुसार, जो देश पहले आगे आए उन्हें सर्वोत्तम शर्तें मिलीं, जबकि जो बाद में आए उन्हें उच्च दरें पेश की गईं। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के साथ पहले व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रंप से बार-बार पूछा गया कि अगला देश कौन सा होगा, और भारत का नाम कई बार लिया गया।
