कांग्रेस में मतभेद: राहुल गांधी और वरिष्ठ नेताओं के बीच टकराव
कांग्रेस में बढ़ते मतभेद
कांग्रेस पार्टी में एक बार फिर से मतभेद उभरते दिखाई दे रहे हैं। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष, भारत की विदेश नीति और देश में एलपीजी (LPG) की आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के विचार भिन्न हैं। जहां राहुल गांधी, जो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, मोदी सरकार की कूटनीति पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं कमलनाथ, आनंद शर्मा, शशि थरूर और मनीष तिवारी जैसे प्रमुख नेताओं ने सरकार के कदमों की सराहना की है।
राहुल गांधी ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर मोदी सरकार की आलोचना की है। उन्होंने भारत की विदेश नीति को कमजोर और समझौतावादी बताया। इसके साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की निंदा करने की मांग की।
हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने इसे जिम्मेदार कूटनीति करार दिया। थरूर का यह बयान राहुल के उस दृष्टिकोण के विपरीत है जिसमें वे सरकार को कूटनीतिक मोर्चे पर असफल बता रहे थे। आनंद शर्मा ने भी कहा कि सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट संकट पर भारत का कूटनीतिक प्रबंधन परिपक्व और कुशल रहा है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय एकता का विषय बताते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में राष्ट्रीय सहमति और एकजुटता आवश्यक है।
कमलनाथ ने कहा कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैस की कोई किल्लत नहीं है और यह केवल एक माहौल बनाया जा रहा है कि आपूर्ति कम है।
कमलनाथ के इस बयान ने भाजपा को कांग्रेस पर हमला करने का अवसर दिया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि जब कांग्रेस के अपने नेता स्वीकार कर रहे हैं कि ईंधन की कोई कमी नहीं है, तो कांग्रेस को जनता के बीच डर फैलाना बंद कर देना चाहिए।
कांग्रेस के भीतर मतभेदों की कहानी ऑपरेशन सिंदूर से शुरू होती है। जब भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त किया था, तब भी राहुल गांधी ने सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर सवाल उठाए थे। उस समय भी शशि थरूर और मनीष तिवारी ने राहुल के रुख से किनारा करते हुए भारतीय सेना के साहस और सरकार के फैसले का समर्थन किया था।
कांग्रेस के भीतर उभरते इन दो ध्रुवों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। एक ओर राहुल गांधी का आक्रामक नेतृत्व है, जो सरकार को हर मोर्चे पर घेरना चाहता है, जबकि दूसरी ओर अनुभवी नेता हैं जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार के साथ खड़े होना बेहतर समझते हैं। मनीष तिवारी ने एक टीवी चैनल पर कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध के मामले में सरकार संभवतः सही कदम उठा रही है।
भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस के भीतर के अंतर्विरोध पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता जानते हैं कि राहुल गांधी अवसरवादी राजनीति कर रहे हैं। भाजपा का मानना है कि वरिष्ठ कांग्रेसियों का सरकार के साथ आना यह दर्शाता है कि राहुल गांधी अपनी ही पार्टी में विश्वास खो रहे हैं।
