कांग्रेस नेता ने परीक्षा प्रश्नपत्र कानून पर उठाए सवाल, सरकार की नीयत पर उठे प्रश्न
कांग्रेस नेता का बयान
नई दिल्ली, 28 जुलाई: कांग्रेस के गौरव गोगोई ने लोकसभा में परीक्षा प्रश्नपत्र निरोधक कानून को मोदी सरकार की 'विफलता का प्रतीक' बताया। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल करने का आदेश किसने दिया। गोगोई ने 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि 2024 में लाया गया मूल कानून भी पेपर लीक रोकने में असफल रहा और नया प्रस्तावित कानून भी अपने लक्ष्य में सफल नहीं होगा।
उन्होंने कहा, 'मंत्री (जितेंद्र सिंह) के वक्तव्य और विधेयक के प्रावधानों से स्पष्ट है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर गंभीर नहीं है और यह केवल दिखावे का विधेयक है।' गोगोई ने 2024 में लाए गए विधेयक का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सरकार ने इसे ऐतिहासिक बताया था, लेकिन उसी वर्ष नीट-यूजी पेपर लीक मामले में 45 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें से अधिकांश को जमानत मिल चुकी है।
गोगोई ने यह भी कहा कि मामले के कथित मास्टरमाइंड को भी जमानत मिल गई। उन्होंने दावा किया, '2024 का कानून उस समय भी विफल साबित हुआ था और नया कानून भी विफल रहेगा, क्योंकि यह सरकार की विफलता का स्मारक है।'
उन्होंने आरोप लगाया कि जब 2024 में पेपर लीक का मामला सामने आया था, तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इससे इनकार किया था और इस बार भी उनका रवैया वैसा ही रहा। कांग्रेस सांसद ने संसद परिसर में भाजपा के कुछ सदस्यों द्वारा प्रधान का स्वागत किए जाने का हवाला देते हुए कहा कि इस सरकार को शर्म आनी चाहिए कि संसद में पूर्व मंत्री का ऐसा स्वागत किया गया मानो वह पाकिस्तान से जंग लड़कर आए हों।
गोगोई ने कहा कि कैबिनेट की बैठक में पेपर लीक माफिया, कोचिंग माफिया और परीक्षा प्रणाली में धांधली पर चर्चा करने के बजाय प्रधानमंत्री 'इंस्टाग्राम' पर ध्यान देने की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उच्चाधिकार समिति का उल्लेख किया है, लेकिन सरकार यह बताए कि उसकी ओर से गठित राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का क्या हुआ।
गोगोई ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के 47 लोगों को हटाए जाने की बात कही गई, जबकि संस्था में स्वीकृत पदों की संख्या 34 है। उन्होंने सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण देने की मांग की।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब एनटीए के महानिदेशक को बदल दिया गया तो चेयरमैन को क्यों बरकरार रखा गया। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि एनटीए के चेयरमैन एक विशेष संगठन से जुड़े हैं और मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में उनके पूर्व कार्यकाल के दौरान भी अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
गोगोई ने कहा कि भाजपा से संबंधित एक वैचारिक संगठन के लिए शिक्षा विभाग महत्वपूर्ण है और विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां इसी सोच के तहत की जा रही हैं। उनका आरोप था कि सरकार के लिए शिक्षा का उद्देश्य लोगों को एक विशेष विचारधारा से जोड़ना और उसके पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित करना नहीं होना चाहिए।
उन्होंने संशोधन विधेयक के प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा कि केवल जुर्माने की राशि बढ़ाने से शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा।
गोगोई ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं को अपने भविष्य की चिंता है और इसी कारण वे सड़कों पर उतरे। उन्होंने 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि वह उन युवाओं को नमन करते हैं जिन्होंने सबको यह याद दिलाया कि लोकतंत्र में सवाल पूछना नागरिकों का मौलिक कर्तव्य है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि गृह मंत्री को सदन में आकर इसका जवाब देना चाहिए कि दिल्ली में छात्रों पर पैलेट गन चलाने, लाठियां भांजने और आंसू गैस के गोले दागने का आदेश किसने दिया था।
गोगोई ने असम में बाढ़ की स्थिति का उल्लेख किया और राज्य के लिए विशेष पैकेज देने का आग्रह किया।
