कांग्रेस नेता दानिश अली ने राम मंदिर चंदे में हेराफेरी की जांच की मांग की
राम मंदिर चंदे में हेराफेरी की जांच की मांग
कांग्रेस के नेता दानिश अली ने राम मंदिर के लिए प्राप्त चंदे में संभावित हेराफेरी की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी की मांग की है। उन्होंने इस मामले को दबाने की आशंका जताते हुए मौजूदा जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। अली ने कहा कि यह स्पष्ट हो चुका है कि जिन लोगों को रखवाले बनाया गया था, वही चोर साबित हुए हैं। चढ़ावे की चोरी एक गंभीर मामला है, जिसकी सज़ा केवल सुप्रीम कोर्ट ही निर्धारित कर सकता है।
जांच की निष्पक्षता पर सवाल
अली ने कहा कि चोरी की घटना पर कोई विवाद नहीं है, और यह बात सभी मानते हैं, यहां तक कि बीजेपी, आरएसएस और ट्रस्ट भी। अब सवाल यह है कि जांच कौन करेगा? उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की निष्पक्षता पर भी संदेह व्यक्त किया। क्या वे लोग जांच करेंगे जो पहरेदार थे और जिनकी निगरानी में चोरी हुई? क्या SIT अपनी रिपोर्ट उन्हीं को सौंपेगी? ऐसा नहीं होने दिया जा सकता।
मामले को दबाने की कोशिश
अली ने इस प्रक्रिया को मामले को दबाने का प्रयास बताया और कहा कि SIT ने अपनी रिपोर्ट पहले ट्रस्ट के एक सदस्य को सौंपी। ट्रस्ट ही FIR की मांग कर रहा है और रिपोर्ट भी मांग रहा है। यह सब मामले को दबाने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है। चंदे की चोरी के तार उच्च पदस्थ लोगों से जुड़े हैं।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
अली ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की उस मांग का समर्थन किया जिसमें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक निश्चित समय सीमा के भीतर जांच कराने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि अजय राय ने राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज से समय सीमा के भीतर जांच कराने की मांग की है। उनका उद्देश्य स्पष्ट है: जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और चढ़ावे की चोरी के दोषियों को बचाया नहीं जाना चाहिए।
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