कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर आर्थिक संकट का आरोप लगाया

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह मौजूदा आर्थिक संकट के कारण घबराई हुई है। उन्होंने सरकार के प्रस्तावित अध्यादेश को एक अस्थायी उपाय बताया, जो अर्थव्यवस्था की गहरी समस्याओं का समाधान नहीं करेगा। रमेश ने निजी कॉर्पोरेट निवेश में कमी के पीछे कई कारणों का उल्लेख किया, जिसमें वास्तविक वेतन में ठहराव और आय असमानता शामिल हैं। उनका कहना है कि भारत में निवेश की स्थिति चिंताजनक है, और यह सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है।
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मोदी सरकार की आर्थिक स्थिति पर सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने 4 जून को केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि मोदी सरकार वर्तमान आर्थिक संकट के चलते घबराई हुई है। उन्होंने एक पोस्ट में यह आरोप लगाया कि सरकार अपने ही तंत्र के भीतर से घिरी हुई है। रमेश ने एक समाचार रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें बताया गया था कि सरकार आयकर अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने पर विचार कर रही है, जिसके तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों में किए गए निवेश पर 12.5% दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर को समाप्त किया जाएगा।


आर्थिक उपायों की अस्थायी प्रकृति

रमेश ने कहा कि एक टीवी चैनल के अनुसार, मोदी सरकार इस अध्यादेश को लाने की योजना बना रही है, जो जुलाई 2024 के केंद्रीय बजट में निर्धारित की गई थी। उन्होंने इसे एक अस्थायी उपाय बताया, जो अर्थव्यवस्था की गहरी संरचनात्मक समस्याओं का समाधान नहीं करेगा।


निवेश में कमी के कारण

रमेश ने यह भी बताया कि भारत में निजी कॉर्पोरेट निवेश कमज़ोर बना हुआ है, जबकि कॉर्पोरेट आय रिकॉर्ड स्तर पर है। उन्होंने कहा कि जीडीपी के अनुपात में निवेश में गिरावट आई है। असली समस्या यह है कि जो लोग भारत में निवेश कर सकते हैं, वे या तो विदेशों में निवेश कर रहे हैं या घरेलू निवेश से दूर रह रहे हैं।


निवेश में मंदी के अन्य कारण

उन्होंने निवेश में मंदी के पीछे वास्तविक वेतन में ठहराव, आय और धन की असमानता, आर्थिक शक्ति का केंद्रीकरण और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग से उत्पन्न भय का उल्लेख किया। इसके अलावा, उन्होंने चीन से आयात में वृद्धि को घरेलू निवेश की समस्याओं का एक और कारण बताया।


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