कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने CBSE की सुरक्षा खामियों पर उठाए सवाल
CBSE की सुरक्षा खामियों पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने 1 जून को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने अपनी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली में सुरक्षा खामियों को स्वीकार किया है। सीबीएसई ने यह भी बताया कि वह ऑनमार्क पोर्टल में खामियों की निगरानी कर रहा है और इसके सुधार के लिए साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की एक टीम नियुक्त की है। रमेश ने X पर एक पोस्ट में अगस्त 2025 में जारी किए गए प्रस्ताव अनुरोध (RFP) में अनियमितताओं का जिक्र किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें अहंकार और अक्षमता का प्रतीक बताया। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह ऑनमार्क पोर्टल को सहायता प्रदान करने वाली कंपनी COEMPT एडुटेक को संरक्षण दे रही है।
CBSE की कार्रवाई पर सवाल
रमेश ने कहा कि CBSE ने अपने ओएसएम सिस्टम में साइबर सुरक्षा खामियों को हफ्तों तक नकारने के बाद अब स्वीकार किया है कि सिस्टम में सेंध लग गई है। लेकिन उन्होंने यह भी पूछा कि CBSE अपने ठेकेदार COEMPT के खिलाफ क्या कदम उठाने जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि CBSE और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को पहले से ही पता था कि COEMPT इस कार्य के लिए उपयुक्त नहीं है।
उन्होंने आगे बताया कि अगस्त 2025 के अपने RFP में, CBSE ने उन विक्रेताओं को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार अपने पास रखा था जो प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहे थे। हालांकि, सितंबर में, CBSE ने एक शुद्धिपत्र जारी किया, जिससे इन विक्रेताओं को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार वापस ले लिया गया। यह COEMPT को बचाने का एक अनजाने में किया गया प्रयास है, जो सरकार द्वारा समर्थित प्रतीत होता है।
कांग्रेस की मांग
रमेश ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को दोहराते हुए कहा कि देश को कब तक ऐसे मंत्री को सहन करना पड़ेगा, जिनके मंत्रालय ने निविदाओं में गंभीर अनियमितताएं की हैं, जिससे लाखों छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि मंत्री प्रधान अहंकार और अक्षमता का प्रतीक हैं, जो अपने राजनीतिक एजेंडे को राष्ट्र की जिम्मेदारियों से ऊपर रखते हैं। प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों को ईमानदारी या नैतिकता के मानकों पर खरा उतरते नहीं देखा गया है। रमेश ने कहा कि मंत्री प्रधान को अपने राजधर्म का पालन करते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर
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