कांग्रेस ने पीएम मोदी के इजरायल भाषण पर उठाए सवाल
कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2026 को इजरायल की संसद नेसेट में एक महत्वपूर्ण भाषण दिया, जिसमें उन्होंने भारत और इजरायल के बीच संबंधों को मजबूत बताया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ, जो कि भारत द्वारा इजरायल को औपचारिक मान्यता देने का दिन है। मोदी ने कहा, "मैं इस भूमि से हमेशा जुड़ा महसूस करता हूं। आखिरकार, मैं उसी दिन पैदा हुआ था जब भारत ने इजरायल को औपचारिक रूप से मान्यता दी—17 सितंबर 1950!"
कांग्रेस ने इस भाषण पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पीएम मोदी ने अपने मेजबान का खुला बचाव किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने इजरायल को उसी दिन मान्यता दी जिस दिन उनका जन्म हुआ।
रमेश ने आगे बताया कि 13 जून 1947 को अल्बर्ट आइंस्टीन ने इजरायल की स्थापना पर जवाहरलाल नेहरू को पत्र लिखा था। एक महीने बाद नेहरू ने आइंस्टीन को उत्तर दिया। 5 नवंबर 1949 को दोनों की मुलाकात प्रिंसटन में हुई थी।
उन्होंने नेहरू और आइंस्टीन के संबंधों का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि नवंबर 1952 में आइंस्टीन को इजरायल के राष्ट्रपति पद का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया। अप्रैल 1955 में आइंस्टीन और नेहरू के बीच परमाणु हथियारों पर पत्रों का आदान-प्रदान भी हुआ।
जयराम रमेश ने नेहरू के 11 जुलाई 1947 के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि नेहरू ने यहूदियों के प्रति सहानुभूति जताई थी, लेकिन फिलिस्तीन के अरबों की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि नेहरू ने दोनों पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कोई एकतरफा समाधान नहीं थोपने की बात कही थी। कांग्रेस ने पीएम मोदी के भाषण को "एकतरफा" और "मेजबान का बचाव" बताते हुए ऐतिहासिक संतुलन पर जोर दिया है।
यह विवाद भारत-इजरायल संबंधों के इतिहास पर नई बहस को जन्म दे रहा है। भारत ने 17 सितंबर 1950 को इजरायल को मान्यता दी थी, लेकिन पूर्ण राजनयिक संबंध 1992 में स्थापित हुए। पीएम मोदी का नेसेट में भाषण पहला अवसर था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इजरायली संसद को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराया और इजरायल के साथ एकजुटता दिखाई।
