कांग्रेस ने केंद्र की विदेश नीति पर उठाए सवाल, जयराम रमेश का तीखा बयान

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों और हालिया ईरान संकट के प्रबंधन में विफलताओं को उजागर किया। रमेश का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दावों पर चुप्पी साध रखी है। इसके अलावा, उन्होंने व्यापार समझौते की एकतरफा प्रकृति पर भी चिंता जताई। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
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कांग्रेस ने केंद्र की विदेश नीति पर उठाए सवाल, जयराम रमेश का तीखा बयान

कांग्रेस महासचिव का हमला

कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को केंद्र सरकार की विदेश नीति पर कड़ा हमला करते हुए इसे पूरी तरह से बेनकाब करार दिया। उन्होंने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों, चीन के साथ तनाव और हालिया ईरान संकट के प्रबंधन में सरकार की विफलताओं को उजागर किया। रमेश ने X पर एक विस्तृत पोस्ट में कहा कि भारत की विदेश नीति, जो स्वयंभू विश्वगुरु के नेतृत्व में है, पूरी तरह से असफल हो चुकी है, भले ही प्रधानमंत्री के समर्थक इसे छिपाने की कोशिश करें। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए हुए है और आतंकी हमलों तथा क्षेत्रीय तनाव के संदर्भ में चिंता व्यक्त की है।


अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों पर चिंता

रमेश ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को बनाए रखे हुए हैं और बार-बार उस व्यक्ति की प्रशंसा कर रहे हैं, जिसकी भड़काऊ टिप्पणियों ने 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि तैयार की थी। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के युद्ध का खुलकर समर्थन किया है। रमेश ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर को रोकने में अमेरिकी नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी।


टैरिफ नीति पर सवाल

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने भारत के अमेरिकी निर्यात पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी देकर 10 मई, 2025 को ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया था। लेकिन प्रधानमंत्री इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। ऑपरेशन सिंदूर को रोकने की पहली घोषणा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 10 मई, 2025 को की थी। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर रमेश ने कहा कि 2 फरवरी, 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि मोदी के अनुरोध पर यह समझौता अंतिम रूप दिया गया है और यह तुरंत लागू हो रहा है। यह स्पष्ट है कि मोदी का यह कदम राहुल गांधी द्वारा संसद में उठाए गए मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए था।


अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का फैसला

उन्होंने आगे बताया कि अठारह दिन बाद, अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने यह घोषणा की कि राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीति, जो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की नींव थी, अवैध और असंवैधानिक है। इस फैसले की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन मोदी ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए ट्रंप पर व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने का दबाव डाला। रमेश ने व्यापार समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि यह एकतरफा था और भारत ने अमेरिका से संबंधित आश्वासनों के बिना आयात पर महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं की थीं।