कांग्रेस को अकबर रोड कार्यालय खाली करने का नोटिस, सियासी हलचल तेज

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अकबर रोड पर स्थित अपने कार्यालय को खाली करने का नोटिस मिला है, जो 1978 से पार्टी के अधीन है। इस आदेश के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, जिसमें कांग्रेस के नेता इसे लोकतंत्र पर हमला मानते हैं। सांसद कार्ति चिदंबरम और प्रमोद तिवारी ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं, जबकि भाजपा सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वह कांग्रेस को दबाने का प्रयास कर रही है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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कांग्रेस को अकबर रोड कार्यालय खाली करने का नोटिस, सियासी हलचल तेज

कांग्रेस का पुराना कार्यालय खाली करने का आदेश

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अपने पुराने कार्यालय, जो अकबर रोड पर स्थित है, को जल्द ही खाली करने का निर्देश दिया गया है। यह कार्यालय 1978 से पार्टी के अधीन है और राष्ट्रीय राजधानी के लुटियंस क्षेत्र में कांग्रेस की पहचान से जुड़ा हुआ है। हाल ही में एक बेदखली नोटिस जारी किया गया है, जिसमें पार्टी को 28 मार्च तक परिसर छोड़ने के लिए कहा गया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद शुरू हो चुका है।


कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया कुछ समय से चल रही है। उन्होंने बताया कि नई ज़मीन और कार्यालय आवंटित किए गए हैं, लेकिन यदि यह कांग्रेस पर लागू किया जा रहा है, तो अन्य पार्टियों पर भी ऐसा ही होना चाहिए जो बंगलों का उपयोग अपने कार्यालयों के रूप में कर रही हैं। वहीं, सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने कहा कि कांग्रेस के पद को छीनने का प्रयास किया जा रहा है।


भाजपा सरकार पर आरोप

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा सरकार लोकतांत्रिक नहीं है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नोटिस हमें प्राप्त होने दीजिए, हम इस पर चर्चा के बाद कार्रवाई करेंगे। सांसद इमरान मसूद ने कहा कि सरकार का मानना है कि दबाव डालकर कांग्रेस को चुप कराया जा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा ने अपने कार्यालयों को भी इसी तरह से खोला है।