कांग्रेस की राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा: ऑपरेशन सिंदूर पर विवाद
कांग्रेस का नया विवाद
इस वर्ष संसद के बजट सत्र में, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब के संदर्भ में मोदी सरकार और भारतीय सेना की कार्यशैली पर सवाल उठाने का प्रयास किया, तब यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर भी राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। उस समय लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा था कि अप्रकाशित सामग्री का सदन में उद्धरण नहीं दिया जा सकता, लेकिन कांग्रेस ने नियमों की अनदेखी करते हुए विवाद खड़ा करने की कोशिश जारी रखी। अब, जब संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने वाला है, कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस देकर एक बार फिर वही रणनीति अपनाई है। इस बार बहाना ऑपरेशन सिंदूर को बनाया गया है.
कांग्रेस के आरोप और रक्षा मंत्रालय का स्पष्टीकरण
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया है कि रक्षा मंत्री ने संसद में यह कहकर सदन को गुमराह किया कि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सैनिकों को कोई क्षति नहीं हुई। कांग्रेस ने इस आधार पर रक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। लेकिन जब आप रक्षा मंत्री के पूरे बयान और उसके संदर्भ को देखेंगे, तो कांग्रेस का आरोप पूरी तरह से राजनीतिक और भ्रामक नजर आएगा.
रक्षा मंत्रालय का स्पष्टीकरण
रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि राजनाथ सिंह के बयान को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, उस समय मीडिया और सोशल मीडिया पर यह दुष्प्रचार फैलाया जा रहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलट मारे गए थे और रॉफेल विमान गिरा दिए गए थे। यह पूरी तरह झूठा और दुर्भावनापूर्ण प्रचार था, जिसका उद्देश्य भारत की सैन्य सफलता को कमतर दिखाना और जनता का मनोबल गिराना था.
कांग्रेस का राजनीतिक रवैया
कांग्रेस का यह रवैया नया नहीं है। यही पार्टी है जिसने रॉफेल सौदे पर लगातार झूठे आरोप लगाए और देश की रक्षा तैयारियों को संदेह के घेरे में खड़ा करने की कोशिश की। अब ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी वही राजनीति दोहराई जा रही है. यह सब महज संयोग नहीं बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक अभियान नजर आता है.
ऑपरेशन सिंदूर का महत्व
ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद विरोधी कार्रवाई का महत्वपूर्ण अध्याय था। यह अभियान 7 मई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ, जिसमें भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढांचों को निशाना बनाया। इस कार्रवाई में सौ से अधिक आतंकवादी और पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जिससे भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद को संरक्षण देने वालों को अब सीधे जवाब का सामना करना पड़ेगा.
राजनाथ सिंह का कार्यकाल
राजनाथ सिंह के कार्यकाल में भारत की सैन्य ताकत, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाई मिली है। उनके नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को अभूतपूर्व गति मिली है। रक्षा उत्पादन वर्ष 2013-14 के लगभग 44 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
कांग्रेस का आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता
कांग्रेस के शासनकाल और मौजूदा दौर के बीच सबसे बड़ा अंतर रक्षा क्षेत्र में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का दिखाई देता है। राजनाथ सिंह के कार्यकाल में भारत ने रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव देखा है, और आज भारत केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं बल्कि रक्षा उपकरणों का तेजी से उभरता निर्यातक बन चुका है.
विपक्ष की भूमिका
विपक्ष की भूमिका लोकतंत्र में महत्वपूर्ण होती है, लेकिन जब विपक्ष तथ्यों की बजाय भ्रम और राजनीति को प्राथमिकता देने लगे, तो उसकी विश्वसनीयता खुद कमजोर होने लगती है. कांग्रेस का आचरण यह दर्शाता है कि वह रक्षा मामलों को भी राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटती.
