कांग्रेस का आरोप: ई20 पेट्रोल से आम जनता को हुआ नुकसान

कांग्रेस पार्टी ने ई20 पेट्रोल के कारण आम और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं पर बढ़ते आर्थिक बोझ का आरोप लगाया है। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इस नीति से केवल एथनॉल उत्पादकों को लाभ हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि उपभोक्ताओं को ई20 पेट्रोल के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। रमेश ने नीति आयोग की सिफारिशों का भी जिक्र किया, जिसमें उपभोक्ताओं को राहत देने की बात कही गई थी। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली, 5 अगस्त: कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को यह आरोप लगाया कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (ई20) की नीति ने आम और मध्यम वर्ग के लोगों से ईंधन के विकल्प को छीन लिया है। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर यह दावा किया कि मार्च 2025 से देश के सामान्य पेट्रोल पंपों पर केवल ई20 पेट्रोल की आपूर्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने यह दावा किया था कि एथनॉल मिश्रण से डीजल की कीमत 50 रुपये प्रति लीटर तक आ जाएगी और पेट्रोल का विकल्प 55 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।


उपभोक्ताओं पर बढ़ा बोझ

रमेश ने यह भी बताया कि एक स्वतंत्र विश्लेषण के अनुसार, अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच एथनॉल मिश्रित ईंधन के कारण उपभोक्ताओं को लगभग 88,234 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता अब ई20 पेट्रोल के लिए पहले के सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक कीमत चुका रहे हैं। उनका कहना था, 'सरकार ई20 के खुदरा मूल्य में कमी कर कम माइलेज से होने वाले नुकसान की भरपाई कर सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।'


नीति आयोग की सिफारिशें

रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि नीति आयोग ने एथनॉल रोडमैप में ई10 और ई20 ईंधन पर उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कर और वित्तीय प्रोत्साहन देने की सिफारिश की थी। इसके बजाय, केंद्र सरकार ने एथनॉल उत्पादकों के लिए 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी को मंजूरी दी, जिससे ई20 कार्यक्रम का लाभ उपभोक्ताओं के बजाय उद्योग को मिला। इस मामले में सरकार की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।