कांग्रेस अध्यक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक पर उठाए सवाल, सरकार के तरीके पर जताई आपत्ति
महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस की स्थिति
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को विपक्ष की बैठक के बाद स्पष्ट किया कि विपक्षी दल महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि विधेयक को पेश करने के तरीके पर आपत्ति है। उन्होंने कहा कि यह कदम राजनीतिक प्रेरणा से भरा हुआ है। इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद खरगे ने कहा कि सभी दल महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करते हैं, लेकिन जिस प्रकार इसे प्रस्तुत किया गया है, उस पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्षी दलों को दबाने के लिए ऐसा कर रही है।
खरगे ने यह भी कहा कि जबकि कांग्रेस ने हमेशा महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है, वे पहले के संशोधनों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन के मुद्दे पर कुछ चालें चल रही है।
विपक्ष का एकजुटता का आह्वान
खरगे ने सभी दलों से संसद में एकजुट होकर लड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वे इस विधेयक का विरोध करेंगे, लेकिन महिलाओं के लिए आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विधेयक में परिसीमन को शामिल करना और जनगणना न कराना संविधान की शक्तियों का दुरुपयोग है।
आईयूएमएल सांसद ई. टी. मोहम्मद बशीर ने कहा कि वे परिसीमन विधेयक का विरोध कर रहे हैं, इसे एक जाल मानते हैं। उन्होंने कहा कि 2023 में भी आरक्षण दिया जा सकता था, और वे इसका समर्थन करते हैं। लेकिन यह संवैधानिक संशोधन एक खतरनाक कदम है।
संविधान संशोधन का विरोध
आरएसपी सांसद एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि परिसीमन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से अनुच्छेद 81 के खंड 3 में संशोधन किया जा रहा है। इसका मतलब है कि सरकार साधारण बहुमत से पूरे देश को नियंत्रित कर सकेगी। उत्तर भारत में सीटों की संख्या में वृद्धि होगी, जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों में कमी आएगी। यह लोकतंत्र के खिलाफ है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है और यह परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। खबरों के अनुसार, केंद्र सरकार 2029 के आम चुनावों से पहले इस आरक्षण को लागू करने की योजना बना रही है।
