कांग्रेस अध्यक्ष ने एथनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति पर प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने एथनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति की विफलता को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने सड़क परिवहन मंत्री और पेट्रोलियम मंत्री को तत्काल हटाने की मांग की है। राय का कहना है कि सरकार ने उपभोक्ताओं की चिंताओं को नजरअंदाज किया है और इस नीति के तहत पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने मंत्री स्तर की जवाबदेही की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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कांग्रेस अध्यक्ष की मांग

लखनऊ, 27 जुलाई: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने एथनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति की असफलता और जनता में बढ़ते असंतोष के संदर्भ में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को तुरंत उनके पदों से हटाने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।


राय ने पत्र में उल्लेख किया कि उन्होंने पहले भी एथनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति से जुड़े वैज्ञानिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शिता और स्वतंत्र वैज्ञानिक परीक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया था। हालांकि, इस पर न तो कोई सार्वजनिक उत्तर मिला और न ही कोई ठोस निर्णय लिया गया।


सरकार की नीतियों पर सवाल

राय ने कहा कि सरकार ई20 के बाद ई85 और ई100 जैसी नीतियों की ओर बढ़ रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि 35 करोड़ से अधिक पंजीकृत वाहनों के उपभोक्ताओं की चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए इस नीति को आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता बन गई है।


उन्होंने बताया कि एथनॉल मिश्रण नीति के समर्थन में यह तर्क दिया गया था कि इससे आयातित तेल पर निर्भरता कम होगी, किसानों को लाभ होगा और उपभोक्ताओं को सस्ता ईंधन मिलेगा। लेकिन वर्तमान में एथनॉल मिश्रित पेट्रोल की कीमत सामान्य पेट्रोल के समान है।


जिम्मेदारी का मुद्दा

पत्र में यह भी कहा गया कि आम धारणा थी कि यदि पेट्रोल में मिलावट पाई जाती थी, तो संबंधित पेट्रोल पंप जिम्मेदार होता था। लेकिन अब जब एथनॉल मिश्रण तेल कंपनियों द्वारा किया जा रहा है, तो किसी तकनीकी समस्या या इंजन को नुकसान की स्थिति में जिम्मेदारी तय नहीं हो रही है।


राय ने कहा कि इससे बीमा दावों और वाहन वारंटी में विवाद उत्पन्न हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले के पत्र में केवल स्वतंत्र वैज्ञानिक परीक्षण और पारदर्शिता की मांग की गई थी, लेकिन अब यह मुद्दा मंत्री स्तर की जवाबदेही का बन गया है।


जवाबदेही की मांग

राय ने आरोप लगाया कि संबंधित मंत्रालय इन गंभीर सवालों का संतोषजनक उत्तर देने में असफल रहे हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक जवाबदेही के सिद्धांत के तहत नितिन गडकरी और हरदीप सिंह पुरी को तुरंत उनके पदों से हटाने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही, एथनॉल नीति से जुड़े संभावित हितों के टकराव की स्वतंत्र जांच की भी बात कही।