कांग्रेस अध्यक्ष का केंद्र सरकार पर हमला: महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर चिंताएं

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि पिछले बारह वर्षों में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के दावों की सच्चाई उजागर हुई है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, 2013 से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में भारी वृद्धि हुई है। किशोरों और वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराधों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या जानकारी दी गई है।
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कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप

कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खर्गे ने केंद्र सरकार पर तीखा आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले बारह वर्षों में उसके शासन ने कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के दावों की वास्तविकता को उजागर कर दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 2013 से कमजोर वर्गों के खिलाफ अपराधों में काफी वृद्धि हुई है।


खर्गे ने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 42.6% की वृद्धि हुई है। बच्चों के खिलाफ अपराधों में 204.6% और दलितों के खिलाफ अत्याचारों में 41.3% की वृद्धि देखी गई है। आदिवासियों के खिलाफ अपराधों में 46.7% की वृद्धि हुई है, जबकि साइबर अपराध में तो 1,689% की भारी वृद्धि हुई है। इसके अलावा, 2024 में 10,546 किसानों, 52,931 दिहाड़ी मजदूरों और 14,488 छात्रों ने आत्महत्या की है।


किशोरों और वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध

राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (एनसीआरबी) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष किशोरों से जुड़े मामलों और वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2024 में किशोरों के खिलाफ 34,878 मामले दर्ज किए गए, जो 2023 में 31,365 मामलों की तुलना में 11.2% की वृद्धि दर्शाते हैं। इस दौरान, अपराध दर 2023 में 7.1 से बढ़कर 2024 में 7.9 हो गई।


इस वर्ष 42,633 किशोरों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 34,648 भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत अपराधों में शामिल थे। गिरफ्तार किशोरों में से 77.7% की आयु 16 से 18 वर्ष के बीच थी, जो आपराधिक गतिविधियों में बड़े किशोरों की अधिक संलिप्तता को दर्शाता है। वहीं, वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष से अधिक) के खिलाफ अपराधों में 2024 में 16.9% की वृद्धि हुई, जहां 2023 में 27,886 मामलों की तुलना में 32,602 मामले दर्ज किए गए।