कश्मीर में आतंकवाद प्रभावित परिवारों के लिए नौकरी की नई पहल

कश्मीर में आतंकवाद से प्रभावित परिवारों के लिए मोदी सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 438 परिवारों को नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए हैं। यह कदम उन परिवारों की ‘बिखरी हुई दुनिया’ को पुनः स्थापित करने का प्रयास है, जिन्होंने हिंसा में अपने प्रियजनों को खोया है। मनोज सिन्हा ने पीड़ित परिवारों के प्रति न्याय और गरिमा बहाल करने का संकल्प लिया है। जानें इस पहल के पीछे की कहानी और उपराज्यपाल का क्या कहना है।
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कश्मीर में आतंकवाद प्रभावित परिवारों के लिए नौकरी की नई पहल

आतंकवाद से प्रभावित परिवारों की सहायता

कश्मीर में आतंकवाद से प्रभावित परिवारों को दशकों तक उपेक्षित रखा गया, लेकिन अब स्थिति में बदलाव आ रहा है। मोदी सरकार और उपराज्यपाल प्रशासन ने इन परिवारों की समस्याओं का समाधान करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बताया कि 2025 से अब तक आतंकवाद से प्रभावित 438 परिवारों के सदस्यों को नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए हैं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन परिवारों की ‘बिखरी हुई दुनिया’ को पुनः स्थापित करने का प्रयास है जिन्होंने हिंसा में अपने प्रियजनों को खोया है। मनोज सिन्हा ने एक कार्यक्रम में कहा कि ये मामले उन घरों का प्रतिनिधित्व करते हैं जहां ‘हंसी की जगह सन्नाटा’ छा गया था, और उन परिवारों का जो वर्षों तक अपने जीवनयापन के लिए संघर्ष करते रहे।


उप राज्यपाल ने आतंकवाद के पीड़ितों के 37 परिजनों और सरकारी कर्मचारियों के 29 परिजनों को नियुक्ति पत्र सौंपे। उन्होंने आतंकवाद के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए आतंकवाद के तंत्र और उनके समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकल्प लिया। मनोज सिन्हा ने कहा, ‘‘मैं आतंकवादी हमलों के पीड़ितों के परिवारों को आश्वस्त करता हूं कि हम उनके गरिमापूर्ण जीवन को सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे। हम उनके प्रति अपने कर्तव्यों को गंभीरता से निभाएंगे और तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक हर परिवार को न्याय नहीं मिल जाता।’’ उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित परिवारों के लिए न्याय केवल सजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उनके जख्मों को भरना और गरिमा को बहाल करना भी शामिल है।


मनोज सिन्हा ने यह भी आरोप लगाया कि दशकों तक आतंकवाद से प्रभावित परिवारों को हाशिए पर रखा गया, जबकि आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े तत्वों को संरक्षण और लाभ मिलता रहा। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सामाजिक नैतिकता के पतन और कानून, विश्वास और न्यायपूर्ण समाज की नींव के कमजोर होने का प्रतीक है। नियुक्ति पत्र मिलने पर प्रभावित परिवारों ने उपराज्यपाल का विशेष आभार व्यक्त किया।