कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पति के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में जांच जारी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में पति के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने पत्नी की याचिका को स्वीकार करते हुए पति द्वारा किए गए अप्राकृतिक यौन संबंध के आरोपों की जांच को आगे बढ़ाने का आदेश दिया है। यह मामला तब शुरू हुआ जब दोनों की मुलाकात आईआईटी मुंबई में हुई थी और बाद में शादी के बाद उत्पीड़न की घटनाएं सामने आईं। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के फैसले के पीछे की कहानी।
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कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पति के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में जांच जारी gyanhigyan

कर्नाटक हाईकोर्ट का निर्णय

कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पति के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में जांच जारी


बेंगलुरु। कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में पति के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि पति ने अपनी पत्नी को अप्राकृतिक यौन संबंध के लिए मजबूर किया था और सोशल मीडिया पर उसकी अश्लील तस्वीरें साझा करने के मामले में आगे की जांच की जाएगी। पीड़िता ने अदालत के इस निर्णय पर संतोष व्यक्त किया है.


आईआईटी मुंबई में हुई थी मुलाकात

यह कपल आईआईटी मुंबई में पीएचडी के दौरान मिला था। धीरे-धीरे उनके बीच प्यार बढ़ा और 2015 में उन्होंने शादी करने का निर्णय लिया। शादी के बाद, वे बेंगलुरु में बस गए।


पति द्वारा प्रताड़ना का आरोप

महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति ने उसे अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के लिए लगातार प्रताड़ित किया। जब उसने ऐसा करने से मना किया, तो पति का व्यवहार उग्र हो जाता था। अंततः, वह अपने माता-पिता के घर चली गई। महिला ने कोर्ट में बताया कि पति ने उसे वापस बुलाने का वादा किया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद वही स्थिति फिर से उत्पन्न हुई। जनवरी 2016 में, उसने पति को स्थायी रूप से छोड़ दिया।


अश्लील तस्वीरें साझा करने का मामला

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसके पति ने एक दिन उसकी अश्लील तस्वीरें उसके पिता के फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट कर दीं और उसके दोस्तों को भी भेज दीं। उसने छत्तीसगढ़ में अपने पति के खिलाफ मामला दर्ज कराया, जिसे बाद में बेंगलुरु स्थानांतरित कर दिया गया।


पति की याचिका पर कोर्ट का फैसला

पति ने अदालत में अपने खिलाफ मामला रद्द करने की मांग की, जबकि पत्नी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने जानबूझकर उसके मामले को कमजोर किया। न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने कहा कि पति की बेगुनाही का कोई सबूत अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने पत्नी की याचिका को स्वीकार करते हुए पुलिस को मामले की आगे की जांच करने का आदेश दिया।