कर्नाटक सरकार ने मंदिरों में चढ़ावे की सुरक्षा के लिए नई SOP लागू की
नई मानक संचालन प्रक्रिया का कार्यान्वयन
कर्नाटक सरकार ने राज्य के मंदिरों में चढ़ावे की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। इस व्यवस्था के तहत, मंदिर परिसरों में सीसीटीवी या वेब कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही, श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान के लिए क्यूआर कोड आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली को अपनाने पर जोर दिया गया है।
चढ़ावे की चोरी के मामलों के बाद उठाया गया कदम
यह निर्णय अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के एक कथित मामले के बाद लिया गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हाल ही में अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि राज्य के सभी बड़े मंदिरों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों के दान-पात्रों से चोरी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह कदम उठाना आवश्यक हो गया था।
सीसीटीवी कैमरों की निगरानी
सरकार ने बताया है कि मुजराई विभाग के अधीन आने वाले मंदिरों में दान-पात्रों के पैसे और गहनों की गिनती के दौरान हेरफेर या चोरी की शिकायतें मिलती रही हैं। इसे रोकने के लिए, सीसीटीवी कैमरों का रिकॉर्डेड फुटेज अब सर्वर पर सुरक्षित रखा जाएगा। इन कैमरों की निगरानी मुजराई विभाग के मुख्यालय और उपायुक्त तथा उपमंडल अधिकारियों के कार्यालयों से की जाएगी।
डिजिटल भुगतान प्रणाली का कार्यान्वयन
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए मंदिरों में क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, जिसमें बैंक का आईएफएससी कोड और अन्य आवश्यक जानकारी शामिल होगी। इसे मंदिर की लेखा प्रणाली के साथ सीधे जोड़ा जाएगा ताकि वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बनी रहे। चोरी को रोकने के लिए विशेष वेब कैमरों का उपयोग किया जाएगा, ताकि कैमरों के लेंस को कपूर के धुएं या अन्य तरीकों से बाधित न किया जा सके।
दान की गिनती की प्रक्रिया में सुधार
दान की गिनती की प्रक्रिया को लेकर कड़े नियम बनाए गए हैं। बड़े मंदिरों में हर हफ्ते और अन्य सक्रिय मंदिरों में हर दो हफ्ते में एक बार तहसीलदार की देखरेख में गिनती की जाएगी। गिनती के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी और तारीखें आधिकारिक कैलेंडर में पहले से तय की जाएंगी। सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं का मूल्य उसी दिन आंका जाएगा और उन्हें तुरंत जिला या सब-ट्रेजरी में जमा कराया जाएगा।
पारदर्शिता के लिए फेस मैचिंग सिस्टम
प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए गिनती में शामिल कर्मचारियों के लिए फेस मैचिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। हुंडी खोलने से लेकर बैंक को नकदी सौंपने तक की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, जिसमें तारीख और समय का स्पष्ट उल्लेख होगा। खास बात यह है कि गिनती के काम में आम लोगों के बजाय केवल होमगार्ड, बैंक कर्मचारियों या सरकारी कर्मचारियों को ही लगाया जाएगा। किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में संबंधित मंदिर अधिकारी और तालुक स्तर के अधिकारी सीधे तौर पर जवाबदेह होंगे।
