कर्नाटक में राजनीतिक हलचल: सिद्धारमैया की इस्तीफे की तैयारी और पारंपरिक नाश्ते की बैठक

कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक महत्वपूर्ण नाश्ते की बैठक आयोजित की, जिसमें राजनीतिक अनिश्चितता के बीच इस्तीफे की चर्चा हुई। बैठक में पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजनों का आनंद लिया गया। इस बीच, राज्यपाल की अनुपस्थिति और संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें भी चल रही हैं। कांग्रेस में सत्ता संघर्ष और रोटेशनल मुख्यमंत्री के विवाद ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। क्या सिद्धारमैया वास्तव में इस्तीफा देंगे? जानिए पूरी कहानी।
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कर्नाटक में राजनीतिक हलचल: सिद्धारमैया की इस्तीफे की तैयारी और पारंपरिक नाश्ते की बैठक gyanhigyan

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की महत्वपूर्ण बैठक

कर्नाटक में राजनीतिक अस्थिरता और नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार सुबह अपने आधिकारिक निवास पर एक महत्वपूर्ण नाश्ते की बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सहित कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए। जबकि एक ओर बंद कमरे में इस्तीफे और नए मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा हो रही थी, वहीं दूसरी ओर मेहमानों को कर्नाटक के पारंपरिक व्यंजनों का आनंद दिया गया।


दक्षिण भारतीय व्यंजनों का विशेष ध्यान

इस महत्वपूर्ण बैठक में न केवल राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई, बल्कि व्यंजनों का भी खास ध्यान रखा गया। नेताओं को पारंपरिक दक्षिण भारतीय नाश्ता परोसा गया, जिसमें गरमा-गरम इडली, कुरकुरे वड़े और क्रिस्पी डोसा शामिल थे। इसके अलावा, खारा बाथ (मसालेदार उपमा) और मीठे में केसरी बाथ (सूजी का हलवा) परोसे गए। तीखी नारियल की चटनी, मसालेदार सांभर, ताजे फल, और अंत में फिल्टर कॉफी और कड़क चाय भी मेन्यू में शामिल थे।


सिद्धारमैया का इस्तीफा

बैठक के दौरान, सिद्धारमैया ने मंत्रियों को बताया कि वह दोपहर के भोजन के बाद अपने पद से इस्तीफा देने की योजना बना रहे हैं। इस बीच, राजनीतिक घटनाक्रमों के मद्देनजर, मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की अटकलें भी लगाई जा रही हैं, जिसमें लगभग 15 से 20 मंत्रियों की जगह नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है।


राज्यपाल की अनुपस्थिति

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, एक पारिवारिक आपातकाल के कारण, बुधवार रात बेंगलुरु से मध्य प्रदेश के लिए रवाना हो गए। सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने रात लगभग 10:30 बजे शहर छोड़ा और उनकी वापसी की कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि राजनीतिक घटनाक्रमों की योजनाओं में कोई बदलाव नहीं आया है।


कांग्रेस में सत्ता संघर्ष

कांग्रेस के भीतर सत्ता संघर्ष तब और बढ़ गया जब कर्नाटक सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा सफर पूरा किया। 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत के बाद, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमुख दावेदार बनकर उभरे। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनने के लिए मनाने में सफलता पाई।


रोटेशनल मुख्यमंत्री का विवाद

इस दौरान, यह भी कहा गया कि नेतृत्व को लेकर गतिरोध को "रोटेशनल मुख्यमंत्री" के फ़ॉर्मूले के माध्यम से सुलझाया गया था, जिसके तहत डीके शिवकुमार को ढाई साल बाद मुख्यमंत्री बनने का मौका मिलना था। हालांकि, इंडियन नेशनल कांग्रेस ने इस व्यवस्था की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।