कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा: संवैधानिक पेच और आगे की राह
राजनीतिक ड्रामा और संवैधानिक जटिलताएँ
कर्नाटक में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच एक संवैधानिक और तकनीकी मुद्दा उभर रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने यह घोषणा की है कि वे दोपहर के भोजन के बाद अपने पद से इस्तीफा देंगे। हालाँकि, राज्यपाल थावरचंद गहलोत एक पारिवारिक आपात स्थिति के कारण बेंगलुरु से इंदौर (मध्य प्रदेश) जा चुके हैं। इस स्थिति ने राजनीतिक हलकों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मुख्यमंत्री का इस्तीफा तब स्वीकार किया जा सकता है जब राज्य के संवैधानिक प्रमुख मौजूद न हों।
संविधान का अनुच्छेद 164 और इस्तीफे की प्रक्रिया
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164 स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाएगी, और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर होगी। इस प्रक्रिया के अनुसार, कोई मुख्यमंत्री तब तक औपचारिक रूप से पदमुक्त नहीं माना जा सकता जब तक कि वह अपना इस्तीफा राज्यपाल को न सौंप दे। चूंकि गहलोत अचानक शहर से बाहर चले गए हैं और उनकी वापसी की कोई निश्चित तारीख नहीं है, मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक वैकल्पिक रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया अपना इस्तीफा सीधे राजभवन को भेजेंगे।
संवैधानिक स्थिति पर विशेषज्ञों की राय
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और संवैधानिक विशेषज्ञ आर.के. सिंह के अनुसार, राज्यपाल का राज्य में न होना मुख्यमंत्री के इस्तीफे की प्रक्रिया में बाधा नहीं डालता। उनके अनुसार, राज्यपाल राज्य के सर्वोच्च संवैधानिक प्राधिकारी होते हैं और उनका अधिकार किसी विशेष स्थान तक सीमित नहीं है। वे देश के किसी भी हिस्से में रहते हुए प्रशासनिक निर्णय ले सकते हैं।
कर्नाटक में आगे की संभावनाएँ
मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि राज्यपाल की अनुपस्थिति से उनके राजनीतिक योजनाओं में कोई बदलाव नहीं आएगा। सिद्धारमैया अपना आधिकारिक इस्तीफा राजभवन के अधिकारियों को सौंपेंगे और इसकी एक प्रति डिजिटल माध्यम से गवर्नर को भेजी जाएगी। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद, नए मुख्यमंत्री (संभावित रूप से डीके शिवकुमार) के शपथ लेने तक सिद्धारमैया को 'कार्यवाहक मुख्यमंत्री' के रूप में बने रहने के लिए कहा जा सकता है।
नई सरकार का गठन
राज्यपाल डिजिटल माध्यम से या लौटकर नए मुख्यमंत्री को सरकार बनाने का न्योता देंगे, जिसके बाद नई कैबिनेट का शपथ ग्रहण शनिवार (30 मई) को संभावित है। संवैधानिक नियमों के अनुसार, सिद्धारमैया के इस्तीफे में कोई कानूनी अड़चन नहीं है। अब यह देखना है कि राजभवन इस प्रक्रिया को कितनी तेजी से आगे बढ़ाता है।
