कर्नाटक में नर्स की आत्महत्या का मामला: कोर्ट ने डॉक्टर के खिलाफ FIR रद्द की
कर्नाटक उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक निजी अस्पताल की नर्स सरिता की आत्महत्या से जुड़े मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी आदेश जारी किया है। अदालत ने आत्महत्या के नोट में नामित एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉक्टर के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) को रद्द कर दिया है। हालांकि, मुख्य आरोपी डॉ. पृथ्वी के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा।
यह मामला एक निजी अस्पताल में एक लव ट्राएंगल से संबंधित है। नर्स सरिता ने मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या कर ली थी। उनकी मां द्वारा दर्ज शिकायत में बताया गया है कि सरिता और डॉ. पृथ्वी के बीच प्रेम संबंध थे, जबकि डॉ. पृथ्वी का संबंध अस्पताल की एक अन्य महिला एनेस्थेसियोलॉजिस्ट के साथ भी था।
सरिता ने आत्महत्या से पहले अपने नोट में दोनों डॉक्टरों का नाम लिया था, जिसके आधार पर पुलिस ने उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपी बनाया था।
अदालत का तर्क
उच्च न्यायालय ने एनेस्थेसियोलॉजिस्ट के खिलाफ मामला रद्द करते हुए कहा कि केवल सुसाइड नोट में नाम होने से किसी को उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि प्रत्यक्ष संलिप्तता न हो। वहीं, मुख्य आरोपी डॉ. पृथ्वी के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने पर अदालत ने कानूनी प्रक्रिया जारी रखने का आदेश दिया है। इस फैसले ने आत्महत्या के लिए उकसाने की परिभाषा पर नई बहस को जन्म दिया है।
बेंगलुरु में छात्र की आत्महत्या
सिलिकॉन सिटी बेंगलुरु से एक और आत्महत्या की घटना सामने आई है। येलाहांका न्यू टाउन स्थित एक निजी कॉलेज के हॉस्टल में रहने वाले 21 वर्षीय छात्र लक्ष्मा मिश्रा ने इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली।
लक्ष्मा, जो झारखंड के रांची का निवासी था, बेंगलुरु में द्वितीय पीयूसी (12वीं कक्षा) की पढ़ाई कर रहा था। पुलिस के अनुसार, यह घटना तड़के करीब 3 बजे हुई। लक्ष्मा ने हॉस्टल की नौवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी।
येलाहांका न्यू टाउन पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आत्महत्या के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। क्या यह परीक्षा का दबाव था या कोई व्यक्तिगत कारण? पुलिस मृतक के सहपाठियों और शिक्षकों से पूछताछ कर रही है। रांची में रहने वाले परिजनों को सूचित कर दिया गया है। इस घटना ने कॉलेज परिसर में शोक की लहर पैदा कर दी है।
