कर्नाटक में 'ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप' पर राजनीतिक विवाद बढ़ा

कर्नाटक में 'ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप' परियोजना को लेकर राजनीतिक संघर्ष तेज हो गया है। बीजेपी और JD(S) ने राहुल गांधी से हस्तक्षेप की मांग की है, जबकि किसानों का कहना है कि उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए हजारों एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे सैकड़ों किसान परिवार प्रभावित होंगे। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और सरकार की प्रतिक्रिया।
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कर्नाटक में 'ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप' पर राजनीतिक विवाद बढ़ा gyanhigyan

राजनीतिक संघर्ष का नया मोड़

कर्नाटक में प्रस्तावित 'ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप' (GBIT) परियोजना को लेकर राजनीतिक विवाद वीकेंड पर और बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल (सेक्युलर) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर इस बड़े टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए हजारों एकड़ कृषि भूमि के अधिग्रहण को रोकने की मांग की है। कर्नाटक बीजेपी के अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने 14 जून को एक पत्र में कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि वह 25 गांवों के 3,500 से अधिक किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है। ये किसान बिदादी और हारोहल्ली के बीच प्रस्तावित 18,000 करोड़ रुपये की लागत वाले टाउनशिप के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। विजयेंद्र ने कहा कि किसानों के विरोध के बावजूद लगभग 7,481 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी से अपील की कि वे राज्य सरकार को निर्देश दें कि वह इस कदम को वापस ले, जिसे उन्होंने "राज्य द्वारा प्रायोजित भूमि हड़पने की कार्रवाई" बताया।


किसानों की चिंताएँ और सरकार की प्रतिक्रिया

एक दिन पहले, कर्नाटक प्रदेश युवा जनता दल (सेक्युलर) के अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने भी राहुल गांधी को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने लोगों की सहमति लिए बिना भूमि अधिग्रहण के अंतिम नोटिफिकेशन जारी कर दिए हैं। निखिल ने कहा कि इस अधिग्रहण से सैकड़ों किसान परिवार प्रभावित होंगे और आरोप लगाया कि सरकार ने 'भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवज़ा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' के तहत सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज किया है। उन्होंने कहा कि इस कदम का सबसे अधिक असर छोटे और सीमांत किसानों, दलितों, पिछड़े वर्गों और भूमि-विहीन खेतिहर मजदूरों पर पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर तीखे हमले किए, आरोप लगाते हुए कहा कि यह टाउनशिप प्रोजेक्ट सरकार और रियल एस्टेट कारोबारियों की मिलीभगत से चलाया जा रहा है।


विकास या रियल एस्टेट का धंधा?

कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों की मर्जी के खिलाफ उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि विरोध करने वालों को डराने-धमकाने के लिए पुलिस का दबाव डाला जा रहा है। इस प्रस्ताव को विकास की पहल के बजाय रियल एस्टेट का धंधा बताते हुए, उन्होंने HUDCO से लोन लेकर 12,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट से अंततः किसानों या आम जनता को नहीं, बल्कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत प्राइवेट डेवलपर्स को लाभ होगा। वहीं, कर्नाटक सरकार ने टाउनशिप प्रोजेक्ट का जोरदार बचाव किया है। सरकार का तर्क है कि बेंगलुरु के लंबे समय के शहरी विस्तार और शहर के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव कम करने के लिए यह प्रोजेक्ट आवश्यक है। आलोचनाओं का जवाब देते हुए, शिवकुमार ने कहा कि यह प्रोजेक्ट पहले की योजना के अनुसार ही आगे बढ़ाया जा रहा है और विरोध के बावजूद यह काम जारी रहेगा।