कर्नाटक में कावेरी जल विवाद पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की बैठक

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कावेरी जल विवाद पर एक बैठक की, जिसमें जल प्रबंधन के निर्देशों और पिछले वर्षों में हुई बारिश के लाभ पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि कर्नाटक ने तमिलनाडु को पानी छोड़ने के आदेश का पालन किया है और पिछले तीन वर्षों में अच्छी बारिश के कारण राज्य ने अपने वादों को पूरा किया है। इस बैठक में जल विवाद के विभिन्न पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया।
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कावेरी जल प्रबंधन की समीक्षा बैठक

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 31 जुलाई को राज्य में कावेरी जल की स्थिति की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। यह बैठक कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के निर्देश के बाद हुई, जिसमें कर्नाटक को कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) की सिफारिशों के अनुसार तमिलनाडु को पानी छोड़ने के लिए कहा गया था।


शिवकुमार ने इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए कहा कि कावेरी जल विवाद पर अब एक निर्णय लिया गया है। CWRC ने कर्नाटक को अगले 15 दिनों में 3500 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया है। उन्होंने बताया कि ऐसे निर्देश कई वर्षों से आते रहे हैं और इस कठिन समय में कई निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने 2016, 2017, 2023, 2024, 2025 और 2026 में जारी विभिन्न आदेशों का उल्लेख किया।


मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों में कर्नाटक में अच्छी बारिश हुई है, जिससे राज्य अपने पानी के बंटवारे के वादों को पूरा करने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले साल तो बारिश ऐतिहासिक स्तर पर हुई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर कृष्ण राज सागर (KRS) बांध पर कावेरी पूजा की और कावेरी आरती में भी भाग लिया।


शिवकुमार ने कहा कि अच्छी बारिश से न केवल लोगों को बल्कि कृषि को भी लाभ हुआ है, और तमिलनाडु को आवश्यकता से अधिक पानी छोड़ा गया। उन्होंने बताया कि लगभग 177 TMC पानी छोड़ने के बजाय, तमिलनाडु की ओर करीब 400 TMC पानी बह गया। मौजूदा परिस्थितियों के कारण हमें उस पानी को छोड़ना पड़ा। तमिलनाडु भी संतुष्ट था और काफी मात्रा में पानी समुद्र में बह गया।