कर्नाटक में कांग्रेस नेतृत्व पर उठे सवाल, सिद्धारमैया की दिल्ली यात्रा
कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें
कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना घटित हुई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को मंगलवार (26 मई) को दिल्ली बुलाया गया है, जहां वे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। सूत्रों के अनुसार, इस यात्रा के दौरान सिद्धारमैया राहुल गांधी से भी मुलाकात कर सकते हैं। इस अचानक बुलावे के बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें फिर से तेज हो गई हैं।
बैठक के एजेंडे में चुनावी रणनीतियाँ
इस बैठक में आगामी संगठनात्मक और चुनावी रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी। सिद्धारमैया के साथ बैठक में निम्नलिखित मुद्दों पर बात होने की संभावना है:
राज्यसभा चुनाव: आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन और रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
विधान परिषद चुनाव: कर्नाटक में होने वाले विधान परिषद चुनावों की तैयारियों और टिकट वितरण पर भी विचार किया जाएगा।
हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन चुनावों के बहाने असली बातचीत मुख्यमंत्री पद को लेकर ही होने वाली है।
खड़गे की बैठक से पहले की स्थिति
इससे पहले, 20 मई को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सिद्धारमैया और शिवकुमार के साथ चर्चा की थी। सूत्रों के अनुसार, खड़गे तिरुवनंतपुरम से बेंगलुरु आए थे, जहां उन्होंने राज्य के ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज के आवास पर चर्चा की। इस बैठक में राज्य में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों पर चर्चा हुई।
कर्नाटक में सत्ता संघर्ष
यह घटनाक्रम कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के तीन साल पूरे होने के बाद सामने आया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच सत्ता की खींचतान भी इस समय चर्चा का विषय है।
पिछले साल नवंबर में जब कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल का आधा सफर पूरा किया, तो नेतृत्व-साझेदारी का मुद्दा और भी ज़ोर पकड़ गया। इससे दोनों नेताओं के बीच 'रोटेशनल मुख्यमंत्री' की व्यवस्था को लेकर अटकलें तेज हो गईं।
शिवकुमार के समर्थक पिछले 18 महीनों से यह दावा कर रहे हैं कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री का पद संभालेंगे, लेकिन अब तक ऐसा कोई बदलाव नहीं हुआ है। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, "पिछले तीन सालों से एक ही बात दोहराई जा रही है।"
राज्य इकाई के भीतर असंतोष बढ़ रहा है, और कई नेता आलाकमान से आग्रह कर रहे हैं कि इस भ्रम को जल्द खत्म किया जाए। उनका तर्क है कि यह अनिश्चितता कर्नाटक में पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। अब, सिद्धारमैया की दिल्ली यात्रा के बाद, सभी की नजरें उनकी बैठक के परिणामों पर टिकी हैं।
