कर्नाटक के गृह मंत्री ने RSS से मांगी कानूनी जानकारी
RSS की कानूनी स्थिति पर सवाल उठाते हुए पत्र
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोमवार को RSS प्रमुख मोहन भागवत को एक पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने संगठन की कानूनी स्थिति, रजिस्ट्रेशन, फंडिंग के स्रोतों और खर्चों के बारे में जानकारी मांगी। खड़गे ने पत्र में उल्लेख किया कि कर्नाटक में RSS की उपस्थिति काफी बड़ी है, जहां 60,000 से अधिक शाखाएं और संबंधित गतिविधियां संचालित हो रही हैं। उनका तर्क था कि इतना बड़ा संगठन कानूनी निगरानी से बाहर नहीं रह सकता।
संविधान और पारदर्शिता की आवश्यकता
खड़गे ने अपने पत्र में कहा कि किसी भी संगठन को, चाहे वह कितना भी पुराना या प्रभावशाली क्यों न हो, जांच से ऊपर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में कार्यरत सभी नागरिकों और संगठनों से कानून का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। खड़गे ने RSS से पारदर्शिता और जवाबदेही की उम्मीद जताई और कहा कि संगठन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह बिना किसी पहचान के कैसे काम कर रहा है।
कानूनी आधार पर सवाल
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि भारत में सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए एक सफाई कर्मचारी का भी रजिस्ट्रेशन आवश्यक है। हर धार्मिक संस्थान और ट्रस्ट का ऑडिट होता है। खड़गे ने कहा कि चैरिटेबल संस्थाओं, NGO, ट्रस्ट और कंपनियों को अपने आर्थिक मामलों और आय के स्रोतों की जानकारी देना अनिवार्य है। यह मांग खड़गे द्वारा पिछले साल से RSS के खिलाफ उठाई गई पहली बड़ी कानूनी पहल है।
RSS के खिलाफ आरोप
गृह मंत्री बनने के बाद से खड़गे ने RSS के कामकाज के कानूनी आधार के बारे में जानकारी मांगी है और इस मुद्दे पर RSS नेताओं के साथ बातचीत का प्रस्ताव भी दिया है। इस साल की शुरुआत में, उन्होंने आरोप लगाया था कि RSS मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त है और यह सवाल उठाया था कि वह 2,500 से अधिक सहयोगी संगठनों के माध्यम से फंड कैसे जुटाती है।
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