कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी की उम्र कैद की सजा स्थगित की

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भाजपा नेता की हत्या के मामले में कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी की उम्र कैद की सजा को स्थगित कर दिया है। अदालत ने उनकी अपील का निस्तारण होने तक उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। यह मामला 2016 में धारवाड़ के भाजपा नेता योगेश गौडर की हत्या से संबंधित है। जानें इस मामले में आगे क्या हुआ और कुलकर्णी की अपील पर अदालत का क्या निर्णय रहा।
 | 
gyanhigyan

उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को भाजपा नेता की 2016 में हुई हत्या के मामले में कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को विशेष अदालत द्वारा दी गई उम्र कैद की सजा को स्थगित कर दिया। अदालत ने उनकी अपील के निस्तारण तक उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। धारवाड़ खंडपीठ ने कुलकर्णी की याचिका को स्वीकार किया, जिसमें उन्होंने सजा को निलंबित करने और दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग की थी। इसके साथ ही, अदालत ने उन्हें पांच लाख रुपये का निजी मुचलका और उतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया।


हत्या का मामला और न्यायिक प्रक्रिया

यह मामला धारवाड़ के भाजपा नेता योगेश गौडर की हत्या से संबंधित है, जो 2016 में हुई थी। न्यायमूर्ति मोहम्मद नवाज और न्यायमूर्ति जी बसवराजु की खंडपीठ ने कुलकर्णी को बिना अदालत की अनुमति के देश छोड़ने से भी रोका और आवश्यकतानुसार उन्हें उच्च न्यायालय और अधीनस्थ अदालत में पेश होने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि कुलकर्णी को दोषी ठहराने का फैसला तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक उनकी अपील का निपटारा नहीं हो जाता।


विशेष अदालत का निर्णय

विशेष अदालत ने 16 अप्रैल को कुलकर्णी और 15 अन्य को इस मामले में दोषी ठहराया था और अगले दिन सजा सुनाई थी। धारवाड़ जिला पंचायत के पूर्व सदस्य योगेश गौडर की हत्या धारवाड़ के एक जिम में हुई थी। प्रारंभ में धारवाड़ उप-नगरीय पुलिस ने मामले की जांच की, लेकिन 2019 में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया। विशेष अदालत ने दिसंबर 2023 में कुलकर्णी और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए।


कुलकर्णी की अपील और सीबीआई का विरोध

अपील की सुनवाई के दौरान, कुलकर्णी ने तर्क किया कि मुकदमे के दौरान जिन सरकारी गवाहों से पूछताछ की गई, उनमें से किसी ने भी अभियोजन के पक्ष में गवाही नहीं दी। उन्होंने यह भी कहा कि सीबीआई को जांच सौंपे जाने के बाद कई महत्वपूर्ण गवाह अपने बयान से मुकर गए। सीबीआई ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि धारवाड़ अदालत में पहले की कार्यवाही के दौरान दर्ज किए गए सबूतों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि गवाहों को प्रभावित किया गया था।


कुलकर्णी की गिरफ्तारी

कुलकर्णी, जो हत्या के समय मंत्री थे, को सीबीआई ने 2020 में गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी, और इस वर्ष की शुरुआत में विशेष अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था।