कपास के आयात पर ड्यूटी में छूट: भारतीय कपड़ा उद्योग को मिलेगी नई ताकत

सरकार ने कपास के आयात पर कस्टम ड्यूटी में 5 महीने की छूट देने का निर्णय लिया है, जो 30 अक्टूबर, 2026 तक प्रभावी रहेगी। यह कदम भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कपास की उपलब्धता बढ़ेगी और लागत में कमी आएगी। उद्योग संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, जिससे घरेलू उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा। जानें इस फैसले के पीछे की वजहें और इसके संभावित लाभ।
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सरकार की नई घोषणा

सरकार ने शनिवार को कपास के आयात पर कस्टम ड्यूटी में 5 महीने की छूट देने का निर्णय लिया है। यह छूट 30 अक्टूबर, 2026 तक प्रभावी रहेगी। पहले, कपास के आयात पर 11 प्रतिशत की ड्यूटी लगाई जा रही थी। यह दूसरी बार है जब पिछले 12 महीनों में सरकार ने कपास के आयात पर ड्यूटी को हटाने का कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में एक नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि यह छूट 1 जून, 2026 से लागू होगी। इस कदम से भारतीय कपड़ा उद्योग में कपास की उपलब्धता में वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे कपड़ा और परिधान उद्योग में कच्चे माल की लागत में कमी आने की संभावना है।


लाभार्थियों की सूची

इस निर्णय से न केवल कपड़ा उद्योग को बल्कि उपभोक्ताओं को भी लाभ होगा। सरकार ने कपास पर ड्यूटी में छूट देने के साथ-साथ किसानों के हितों का भी ध्यान रखा है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस कदम से घरेलू कपड़ा उद्योग, विशेषकर लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे बाजार में कपास की उपलब्धता में सुधार होगा। भारत ने 2030 तक कपड़ा और परिधान निर्यात को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। कपड़ा मंत्रालय ने कहा कि इस निर्णय से कपड़ा उद्योग के लिए कॉटन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे लागत में कमी आएगी और भारतीय कपड़ा क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होगी।


उद्योग संगठनों की प्रतिक्रिया

उद्योग संगठनों ने इस निर्णय को कपड़ा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण राहत बताया है। भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ (सिटी) के चेयरमैन अश्विन चंद्रन ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच 11 प्रतिशत की इंपोर्ट ड्यूटी भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता में बाधा बन रही थी, क्योंकि एशिया के अन्य प्रमुख देशों में कपास ड्यूटी-फ्री उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि इंपोर्ट ड्यूटी के कारण मूल्य श्रृंखला में लागत बढ़ रही थी, जिससे भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात को बढ़ाने के प्रयासों में रुकावट आ रही थी।