कन्हैया कुमार का बिहार पुलिस पर गंभीर आरोप: लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन

कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने बिहार पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि हाल के नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया। उन्होंने पुलिस के बर्बरता और असंगत प्रतिक्रिया की आलोचना की, साथ ही यह भी बताया कि नाबालिगों को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। कुमार ने राज्य सरकार पर लोकतंत्र को लाठीतंत्र में बदलने का आरोप लगाया और पुलिस से स्पष्टता की मांग की। इस मामले में और क्या खुलासे होंगे, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
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कांग्रेस नेता का आरोप

पटना, चार अगस्त: कांग्रेस के नेता कन्हैया कुमार ने मंगलवार को बिहार पुलिस पर आरोप लगाया कि हाल ही में नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उन्होंने 'कानूनी प्रक्रियाओं और नियमों' का उल्लंघन किया। कुमार ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि शनिवार और रविवार को बिहार के छह जिलों में कांग्रेस द्वारा की गई तथ्यान्वेषी जांच के परिणामों का खुलासा किया।


उन्होंने कहा कि पुलिस के प्रदर्शन को नियंत्रित करने के तरीके में 'खतरनाक बदलाव' आया है, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस के अंधाधुंध उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।


कुमार ने कहा, 'राज्य सरकार लोकतंत्र को लाठीतंत्र और गोलीतंत्र में बदलने की कोशिश कर रही है। असहमति के प्रति असहिष्णुता का माहौल बन गया है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस की तथ्यान्वेषी टीम ने पाया कि पुलिस ने प्रदर्शनों के दौरान नियमों की अनदेखी की।


कुमार ने कहा, 'हमने अपनी जांच में वीडियो, तस्वीरें, पीड़ितों की गवाही और पुलिसकर्मियों के बयान इकट्ठा किए।'


हालांकि, प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन पुलिस की प्रतिक्रिया को असंगत और बर्बरतापूर्ण बताया गया।


उन्होंने जांच के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों को जानबूझकर कमर के ऊपर गोली मारी गई, सिवान में एके-47 का इस्तेमाल किया गया, और नाबालिगों को हिरासत में लिया गया।


कुमार ने कहा, 'अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे एक युवक के पैर में गोली लगी, जबकि अरवल के एक अन्य युवक के गर्दन के पास गोली लगी। नाबालिगों को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और कई मामलों में परिजनों को जानकारी नहीं दी गई।'


उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विद्यार्थियों को अलग-अलग थानों में ले जाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और कुछ मामलों में पुलिसकर्मियों ने उन्हें 'आतंकवादी' कहा।


कुमार ने यह दावा भी किया कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने अपने 'राजनीतिक आकाओं' को खुश करने के लिए कानून का उल्लंघन किया।


उन्होंने यह भी कहा कि यह गलत है कि सभी मामलों को वापस ले लिया गया है, क्योंकि भागलपुर जैसे जिलों में अब भी विद्यार्थियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।


कुमार ने पुलिस से स्पष्टता मांगी कि कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया, किन धाराओं में कार्रवाई हुई और कितनों को रिहा किया गया।


उन्होंने कहा, 'बिहार लोकतंत्र की जननी है और हम इसे पुलिस राज्य नहीं बनने देंगे।'