कच्चे तेल की कीमतों पर फिच का नया अनुमान: 2026 में राहत की उम्मीद नहीं
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
पिछले 100 दिनों से कच्चे तेल की चर्चा सबसे अधिक हो रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण, कई देशों को तेल संकट का सामना करना पड़ रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चा तेल, जो पहले 70-75 डॉलर प्रति बैरल बिकता था, अब 100-120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। इस स्थिति में, ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने तेल की कीमतों के बारे में एक नया अनुमान पेश किया है।
फिच के अनुसार, 2026 में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कोई खास राहत नहीं मिलेगी। उनका अनुमान है कि औसतन कच्चे तेल की कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहेगी। मई से जुलाई के बीच, कच्चे तेल की कीमतें 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती हैं।
यदि ईरान होर्मुज को खोलने के लिए सहमत होता है और जहाजों की आवाजाही शुरू होती है, तो तेल की कीमतों में थोड़ी कमी आ सकती है। होर्मुज खुलने की स्थिति में अगस्त और सितंबर में कीमतों में तेजी से गिरावट देखने को मिल सकती है।
फिच का मानना है कि 2026 में कच्चे तेल की कीमतें औसतन 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने की संभावना है। अगस्त के बाद, कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती हैं, और सितंबर के बाद लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का अनुमान है। यह गिरावट इस आधार पर है कि जुलाई में होर्मुज खुल जाए।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। यह रास्ता दुनिया के तेल सप्लाई का पांचवां हिस्सा है। युद्ध के कारण होर्मुज बंद है, लेकिन तेल के भंडारों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। ऐसे में, सप्लाई शुरू होने के बाद 2026 के अंत तक तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है।
