औरंगाबाद में ठगी का मामला: बाबा ने पैसों की बारिश का झांसा देकर लोगों को ठगा
पैसों की चाहत में ठगी का शिकार
पैसे की चाह हर किसी में होती है। अधिकांश लोग चाहते हैं कि कम समय और प्रयास में उन्हें अधिक धन प्राप्त हो। इसके लिए कई लोग विभिन्न तरीकों का सहारा लेते हैं और कई बार ठगी का शिकार भी हो जाते हैं। ऐसा ही एक मामला औरंगाबाद के छत्रपति संभाजीनगर में सामने आया, जहां एक बाबा लोगों को यह विश्वास दिलाता था कि वह उन्हें पैसे की बारिश करवा सकता है।
यह कहानी तब शुरू हुई जब शहर के पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार को एक गुप्त सूचना मिली। सूचना के अनुसार, बाबा पेट्रोल पंप के पास एक होटल में कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के साथ ठहरा हुआ था। पुलिस ने तुरंत अपनी विश्वसनीय टीम को इस मामले की जांच करने का आदेश दिया। इंस्पेक्टर संभाजी पवार, जो अपनी हाजिरजवाबी और साहस के लिए जाने जाते हैं, ने अपनी टीम के साथ होटल पर छापा मारा।
जब पुलिस होटल के कमरे नंबर 305 में पहुंची, तो वहां विकास उत्तरवार नामक व्यक्ति छिपा हुआ था, जो 29 दिसंबर, 2024 से वहां ठहरा हुआ था। विकास ने खुद को एक तांत्रिक बाबा बताया। वहीं, कमरे नंबर 412 में उसके दो साथी, विलास कोहिले और शंकर कजाले, पुणे के एक व्यक्ति के नाम पर बुक किए गए कमरे में रह रहे थे। ये तीनों मिलकर एक ऐसा जाल बुन रहे थे, जिसमें लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा देते थे।
पुलिस ने जब कमरों की तलाशी ली, तो वहां का दृश्य भयावह था। मेज पर नकली नोट, सिंदूर की डिब्बियां, सूखी जड़ें और नारियल बिखरे हुए थे। ये सभी चीजें उन अनुष्ठानों का हिस्सा थीं, जिनके जरिए ये ठग भोले-भाले लोगों को बेवकूफ बनाते थे। एक अनुष्ठान के माध्यम से पैसे की बारिश का जादुई वादा किया जाता था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन ठगों ने ऐसा माहौल बनाया था कि लोग उनकी बातों में आकर अपनी जमा-पूंजी सौंप देते थे।
पुलिस की पूछताछ में यह मामला और भी गंभीर हो गया। सहायक पुलिस निरीक्षक काशीनाथ महादुले की शिकायत पर इन तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके साथ ही, महाराष्ट्र मानव बलि और अन्य अमानवीय प्रथाओं के खिलाफ कानून के तहत भी कार्रवाई की गई। इन तीनों को क्रांति चौक पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
