ओवैसी ने भारत-पाकिस्तान तनाव में चीन की मध्यस्थता के दावे का किया खंडन
चीन की मध्यस्थता पर ओवैसी का बयान
एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव में चीन की मध्यस्थता के दावे का खंडन करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पड़ोसी देश के साथ संबंधों में सामान्यता भारत की संप्रभुता की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार यह कहने के बाद कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को रोका, चीन ने मई 2025 में चार दिनों तक चले संघर्ष के दौरान तनाव कम करने में अपनी भूमिका का दावा किया। ओवैसी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा युद्धविराम की घोषणा करने और शांति स्थापित करने के लिए व्यापार प्रतिबंधों का उपयोग करने का दावा करने के बाद, चीनी विदेश मंत्री भी इसी तरह के दावे कर रहे हैं।
भारत की संप्रभुता का सम्मान जरूरी
ओवैसी ने कहा कि यह भारत का अपमान है और सरकार को इस दावे का कड़ा खंडन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में सामान्यता भारत के सम्मान या उसकी संप्रभुता की कीमत पर नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी कहा कि चीन का यह दावा चौंकाने वाला है कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता कर रहा है। ओवैसी ने यह भी बताया कि चीन दक्षिण एशिया में अपनी श्रेष्ठता साबित करने की कोशिश कर रहा है।
चीन का दोहरा रवैया
उन्होंने कहा कि चीन पाकिस्तान को 81 प्रतिशत हथियार मुहैया कराता है और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वास्तविक समय की खुफिया जानकारी प्रदान करता है, जबकि दूसरी ओर वह मध्यस्थता का दावा करता है। यह स्थिति अस्वीकार्य है और भारत को इसे चुपचाप सहन नहीं करना चाहिए। ओवैसी ने कहा कि चीन के दावों ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस का भी केंद्र सरकार पर हमला
बुधवार को कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए इसे नई दिल्ली की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ एक 'मजाक' बताया।
