ओवैसी ने नागरिकता जांच पर उठाए सवाल, सरकार के इरादों पर जताई चिंता
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने नागरिकता की जांच के मुद्दे पर सरकार की नीतियों की आलोचना की है। उन्होंने नागरिकता प्रमाण पत्र को राष्ट्रीयता का एकमात्र सबूत मानने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह प्रक्रिया अधिकांश जनसंख्या पर लागू नहीं होती। ओवैसी ने 1967 के पासपोर्ट एक्ट का हवाला देते हुए नागरिकता के प्रमाण के रूप में पासपोर्ट की वैधता पर भी चर्चा की। उनके बयान से यह स्पष्ट होता है कि वे सरकार के इरादों को लेकर चिंतित हैं।
| Jun 25, 2026, 19:32 IST
ओवैसी का सरकार पर आरोप
एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को नागरिकता की जांच के संदर्भ में सरकार के दृष्टिकोण की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दिए जा रहे बयानों का उद्देश्य लोगों को जानबूझकर बाहर करने का माहौल तैयार करना है। हैदराबाद में अपने संबोधन में, ओवैसी ने भारतीय नागरिकता को साबित करने के लिए बदलते मानदंडों पर चिंता व्यक्त की और इसके आम नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभावों पर सवाल उठाए।
सरकार के एजेंडे पर सवाल
ओवैसी ने सरकार के लंबे समय से चल रहे एजेंडे पर गहरा संदेह जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन नागरिकता की स्थिति को मनमाने तरीके से चुनौती देने की शक्ति हासिल करना चाहता है। इस संदर्भ में, उन्होंने कहा कि संभवतः सरकार यह संकेत दे रही है कि 2030 में केवल उन्हीं व्यक्तियों को भारतीय नागरिक माना जाएगा जिनके पास बीजेपी का सदस्यता कार्ड होगा।
पासपोर्ट एक्ट का उल्लेख
ओवैसी ने 1967 के पासपोर्ट एक्ट का हवाला देते हुए नागरिकता के प्रमाण के रूप में पासपोर्ट की वैधता पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह दस्तावेज़ कड़ी पुलिस जांच के बाद ही जारी किया जाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि इसे रखने वाला व्यक्ति भारतीय नागरिक है। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है। यदि आप पासपोर्ट एक्ट 1967 को पढ़ेंगे, तो उसमें स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह किसी गैर-भारतीय नागरिक को नहीं दिया जा सकता।
नागरिकता प्रमाण पत्र पर आपत्ति
हैदराबाद के सांसद ने इस बात का विरोध किया कि नागरिकता का प्रमाण-पत्र ही राष्ट्रीयता का एकमात्र सबूत होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे प्रमाण-पत्र आमतौर पर उन लोगों के लिए होते हैं जो रजिस्ट्रेशन या नेचुरलाइज़ेशन के माध्यम से नागरिकता प्राप्त करते हैं। ओवैसी ने कहा कि देश में जन्मी अधिकांश जनसंख्या पर यह प्रक्रिया लागू नहीं होती। उन्होंने अपने वंश का उल्लेख करते हुए कहा कि वह जन्म से और अपनी इच्छा से भारतीय नागरिक हैं।
अतिरिक्त दस्तावेज़ों की आवश्यकता पर सवाल
ओवैसी ने सरकार की ओर से अतिरिक्त दस्तावेज़ों की आवश्यकता को चुनौती देते हुए अपनी वंशावली का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार को किसी भी व्यक्ति से अचानक यह पूछने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि 'क्या आप भारतीय हैं?' यह सवाल उठाते हुए उन्होंने नागरिकता के मुद्दे पर अपनी चिंताओं को साझा किया।
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