ओडिशा सरकार ने जगन्नाथ रथ यात्रा को यूनेस्को की सूची में शामिल करने की मांग की
जगन्नाथ रथ यात्रा का महत्व
भुवनेश्वर, तीन अगस्त: ओडिशा सरकार ने पुरी में आयोजित भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को यूनेस्को की 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर' सूची में शामिल करने के लिए केंद्र से सहयोग की अपील की है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजते हुए केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय से अनुरोध किया है कि इस नामांकन को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने में आवश्यक सहायता प्रदान की जाए।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को एक अगस्त को लिखे पत्र में उल्लेख किया कि रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह एक कालजयी सभ्यतागत परंपरा है। उन्होंने कहा, 'भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता, समावेशिता, आध्यात्मिकता, शिल्पकला, संगीत, नृत्य और सामुदायिक सहभागिता का प्रतीक है।'
माझी ने यह भी बताया कि यह सदियों पुराना उत्सव दुनिया भर से लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है और भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत के स्थायी प्रतीकों में से एक है। उन्होंने कहा कि यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल होने से भारत की अमूर्त सांस्कृतिक परंपराओं को वैश्विक पहचान मिलेगी और इनके संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान होगा।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को सूचित किया कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही निर्धारित प्रारूप में जमा कर दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मंत्रालय को किसी अतिरिक्त जानकारी या सहायता की आवश्यकता होती है, तो ओडिशा सरकार और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं। इस वर्ष 16 से 27 जुलाई के बीच आयोजित वार्षिक पुरी रथ यात्रा में 50 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया।
