ओडिशा के SCB मेडिकल कॉलेज में आग से 10 मरीजों की मौत, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

ओडिशा के कटक में SCB मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा केयर ICU में आग लगने से 10 मरीजों की जान चली गई। मुख्यमंत्री ने मुआवजे का ऐलान किया और घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। इस घटना ने अस्पतालों में सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों में गुस्सा और दुख का माहौल है, और सरकार ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं।
 | 
ओडिशा के SCB मेडिकल कॉलेज में आग से 10 मरीजों की मौत, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

भीषण आग की घटना


सोमवार की सुबह ओडिशा के कटक में स्थित SCB मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल के ट्रॉमा केयर ICU में एक भयंकर आग लग गई, जिससे कम से कम 10 मरीजों की जान चली गई। यह दुखद घटना राज्य में हड़कंप मचा गई, क्योंकि कई गंभीर मरीज वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। आग लगभग 2:30 से 3 बजे के बीच लगी, जिससे धुएं के कारण वार्ड में अफरा-तफरी मच गई और मरीजों को बचाने में कठिनाई हुई।


मुख्यमंत्री का दौरा और मुआवजा

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने घटनास्थल का दौरा किया और बताया कि ट्रॉमा केयर ICU में कुल 23 मरीज थे, जिनमें से 7 की मौत ICU के अंदर हुई, जबकि 3 अन्य मरीजों की मौत बचाव के दौरान हुई। कुल 10 मौतों की पुष्टि की गई है। इस हादसे में अस्पताल के 11 स्टाफ सदस्य भी झुलस गए हैं, जिनमें से 5 की हालत गंभीर है।


मुख्यमंत्री ने कहा, "यह एक अत्यंत दुखद घटना है। आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी है। हमने प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्णय लिया है। घायलों का इलाज राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।" उन्होंने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए और अस्पताल में सुरक्षा मानकों की समीक्षा का निर्देश दिया।


आग लगने का कारण और बचाव कार्य

गवाहों के अनुसार, आग पहले फर्स्ट फ्लोर पर ट्रॉमा केयर यूनिट में लगी, जहां इलेक्ट्रिकल उपकरणों से शॉर्ट सर्किट हुआ। धुआं इतना घना था कि कई मरीजों को वेंटिलेटर से अलग नहीं किया जा सका, जिससे उनकी मौत हो गई। दमकल की 8-10 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्टाफ ने जान जोखिम में डालकर मरीजों को बाहर निकाला, लेकिन कई मरीज पहले से ही गंभीर स्थिति में थे।


सुरक्षा मानकों पर सवाल

SCB मेडिकल कॉलेज ओडिशा का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। यह घटना अस्पतालों में फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की जांच पर सवाल खड़ा करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ICU जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बैकअप पावर, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम की कमी या खराबी ऐसी त्रासदियों का कारण बन सकती है।


परिजनों का गुस्सा

परिजनों में गुस्सा और दुख का माहौल है। कई लोग अस्पताल के बाहर इकट्ठा होकर रो रहे हैं और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। एक परिजन ने कहा, "हमारे रिश्तेदार पहले से गंभीर थे, लेकिन अस्पताल में आग लगने से सब कुछ खत्म हो गया।"


सरकार की राहत कार्य

ओडिशा सरकार ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है और सभी मरीजों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जा रहा है। राज्य भर में अस्पतालों की फायर सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।


पिछले हादसों की याद

यह घटना ओडिशा में पिछले कुछ वर्षों में अस्पतालों में लगी आग की घटनाओं की याद दिलाती है, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा है।