ऑनलाइन दवाइयों के खिलाफ केमिस्टों की हड़ताल, जानें क्या रहेगा बंद
देशव्यापी हड़ताल का ऐलान
नई दिल्ली। ईफार्मेसी द्वारा ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री और भारी छूट के खिलाफ आज, बुधवार को ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स ने एक व्यापक हड़ताल की घोषणा की है।
प्रदर्शन का उद्देश्य
एसोसिएशन का कहना है कि इस विरोध का मुख्य उद्देश्य उन नियामक कमियों को उजागर करना है, जिनके कारण ईफार्मेसी और त्वरित दवा वितरण प्लेटफॉर्म बिना उचित निगरानी के कार्य कर रहे हैं।
दुकानों का बंद रहना
संगठन का दावा है कि इस हड़ताल के तहत देशभर में 12,50,000 और बिहार में 40,000 केमिस्ट की दुकानें बंद रहेंगी। भारत और बिहार की सभी दुकानें एक साथ बंद रहेंगी।
खुली रहने वाली दुकानें
हालांकि, 20 मई को देशभर में सभी प्रमुख फार्मेसी चेन, अस्पतालों के मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी खुली रहेंगी। कई राज्य स्तरीय फार्मेसी एसोसिएशनों ने भी इस बंद में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया है।
राज्यवार स्थिति
उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़, सिक्किम, उत्तराखंड और लद्दाख के रीटेल फार्मेसी एसोसिएशंस ने आश्वासन दिया है कि उनके राज्यों में दवा की दुकानें खुली रहेंगी और दवाओं की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। हालांकि, कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों और मध्य प्रदेश में हड़ताल का व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
एआईओसीडी की मांगें
एआईओसीडी ने यह कदम तब उठाया है जब हाल ही में उनके प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय दवा नियामक से मुलाकात की और ईफार्मेसी के संचालन और नियमन से संबंधित अपनी चिंताओं को साझा किया।
केमिस्टों का विरोध
प्रभाकर कुमार ने दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ केमिस्टों के विरोध को स्पष्ट करते हुए कहा कि खुदरा फार्मेसियां कड़े ‘प्रिस्क्रिप्शनबेस्ड’ सिस्टम के तहत कार्य करती हैं और प्रतिबंधित दवाओं का विस्तृत रिकॉर्ड रखती हैं।
ईफार्मेसी पर आरोप
उन्होंने ईफार्मेसी सिस्टम पर आरोप लगाया कि यह उन दवाओं तक ऑनलाइन पहुंच की अनुमति देता है जिन्हें अन्यथा नियंत्रित किया जाना चाहिए और डिजिटल लेनदेन में नकली पर्चों के संभावित उपयोग के प्रति चेतावनी दी।
नियामक की प्रतिक्रिया
सूत्रों के अनुसार, नियामक ने आश्वासन दिया है कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों की सक्रिय रूप से समीक्षा की जा रही है और इस क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे की जांच की जा रही है, ताकि खुदरा फार्मेसी से जुड़े लोगों की उचित चिंताओं का समाधान किया जा सके।
