एलन मस्क और ट्रंप की ऐतिहासिक यात्रा: बीजिंग में व्यापारिक समिट

एलन मस्क ने पुष्टि की है कि वे राष्ट्रपति ट्रंप के साथ एयर फ़ोर्स वन में बीजिंग की यात्रा पर जा रहे हैं। यह यात्रा लगभग एक दशक बाद हो रही है और इसका उद्देश्य वैश्विक आर्थिक तनाव को कम करना है। इस हाईप्रोफाइल डेलीगेशन में अन्य प्रमुख उद्योगपति भी शामिल हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की अपील की है। पूरी दुनिया की नजरें इस महत्वपूर्ण समिट पर टिकी हैं।
 | 
gyanhigyan

एलन मस्क की बीजिंग यात्रा की पुष्टि

दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति, एलन मस्क ने यह जानकारी दी है कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एयर फ़ोर्स वन में सवार होकर चीन की यात्रा पर जा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “एयर फ़ोर्स वन में बीजिंग जा रहा हूँ।”


9 साल बाद चीन की यात्रा

यह यात्रा कूटनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि लगभग एक दशक के बाद कोई मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति चीन का दौरा कर रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली इस समिट का मुख्य उद्देश्य वैश्विक तनाव के बीच आर्थिक गतिरोध को कम करना और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना है।


उद्योगपतियों का समूह

व्हाइट हाउस के इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में केवल एलन मस्क ही नहीं, बल्कि एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग और अन्य शीर्ष अमेरिकी कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव भी शामिल हैं।


  • एनवीडिया के लिए यह दौरा खास है क्योंकि कंपनी चीन में अपने एडवांस्ड H200 एआई चिप्स बेचने के लिए रेगुलेटरी मंजूरी की तलाश में है।
  • प्रतिनिधिमंडल में शामिल अन्य लीडर्स भी चीन में अपने कारोबार को विस्तार देने और कानूनी बाधाओं को दूर करने की कोशिश करेंगे।


ट्रंप का बयान

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बिजनेस डेलीगेशन की भूमिका पर जोर देते हुए ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “मैं राष्ट्रपति शी, जो एक बेहद खास लीडर हैं, से चीन को पूरी तरह ‘खोलने’ का आग्रह करूंगा ताकि ये शानदार बिजनेस लीडर्स अपना जादू चला सकें और व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकें।”


तैयारियों का दौर

बीजिंग समिट से पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने दक्षिण कोरिया में चीनी अधिकारियों के साथ प्रारंभिक बातचीत की थी। इस बातचीत का उद्देश्य दोनों देशों के बीच पिछले साल हुए नाजुक ट्रेड एग्रीमेंट को स्थिर बनाए रखना था। अब पूरी दुनिया की नजरें बीजिंग में होने वाली इस महाशक्ति मुलाकात पर टिकी हैं।