एम्स भोपाल की डॉक्टर रश्मि वर्मा का निधन: मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता
डॉक्टर रश्मि वर्मा का निधन
भोपाल । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल में इमरजेंसी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर, डॉ. रश्मि वर्मा का आज निधन हो गया। 23 दिनों तक चले इलाज के बाद उन्होंने जिंदगी की जंग हार दी। 11 दिसंबर को मानसिक तनाव के चलते उठाए गए आत्मघाती कदम के बाद से वे वेंटिलेटर पर थीं। डॉक्टरों की सभी कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
सूत्रों के अनुसार, डॉ. वर्मा को एनेस्थीसिया की ओवरडोज के कारण लगभग 7 मिनट तक कार्डियक अरेस्ट का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें गंभीर ब्रेन डैमेज हुआ। इस घटना के बाद उनकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी। एम्स भोपाल के चिकित्सकों ने निरंतर इलाज और निगरानी की, लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और अंततः उनका निधन हो गया। डॉ. रश्मि वर्मा को एक समर्पित चिकित्सक के रूप में जाना जाता था। उनके निधन से एम्स भोपाल और पूरे मेडिकल समुदाय में शोक की लहर है। सहकर्मियों और जूनियर डॉक्टरों ने उन्हें एक मेहनती और संवेदनशील डॉक्टर बताया।
यह दुखद घटना एक बार फिर मेडिकल पेशे में डॉक्टरों पर बढ़ते मानसिक दबाव, लंबे कार्य घंटे, और कथित टॉक्सिक वर्क कल्चर पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार तनाव और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त सहयोग तंत्र की कमी के कारण डॉक्टर गंभीर मानसिक संकट का सामना कर रहे हैं।
डॉ. रश्मि वर्मा के निधन पर कई डॉक्टर संगठनों और मेडिकल समुदाय के सदस्यों ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कार्यस्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता, काउंसलिंग सिस्टम और स्वस्थ कार्य वातावरण की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ऐसी घटनाएं भविष्य में और भी चिंताजनक हो सकती हैं। डॉ. रश्मि वर्मा का निधन न केवल एक होनहार चिकित्सक को खोने का दुख है, बल्कि यह स्वास्थ्य व्यवस्था में मौजूद दबाव और चुनौतियों पर गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता को भी उजागर करता है।
