ऋषिकेश-भानियावाला राजमार्ग परियोजना पर बढ़ता विरोध, पेड़ों की कटाई पर चिंता
विरोध प्रदर्शन की तीव्रता में वृद्धि
राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के संवेदनशील हाथी गलियारे में प्रस्तावित ऋषिकेश-भानियावाला चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। सोमवार को, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में, सात मोड़ क्षेत्र में पेड़ों की कटाई का कार्य शुरू किया गया। इस चौड़ीकरण योजना के तहत कुल 3,000 पेड़ों को काटने की योजना बनाई गई है, जिसका विरोध पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों द्वारा पिछले कई दिनों से किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों का चिपको आंदोलन की राह अपनाना
पेड़ों की रक्षा के लिए प्रदर्शनकारियों ने ऐतिहासिक चिपको आंदोलन की तर्ज पर पेड़ों से चिपकने का निर्णय लिया। हालांकि, पुलिस ने बलपूर्वक प्रदर्शनकारियों को हटाकर उन्हें वाहनों में बैठाया और वहां से ले गई। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी भावुक हो गए और उन्होंने सरकार पर विकास के नाम पर प्राकृतिक धरोहर को नष्ट करने का आरोप लगाया।
स्थानीय नागरिकों की चिंताएं
प्रदर्शन में शामिल एक स्थानीय नागरिक बीना वर्मा ने कहा कि विकास के नाम पर इस प्राकृतिक संपदा को नष्ट करना उचित नहीं है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि यदि इसी तरह हरे-भरे जंगलों को काटा गया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह केवल एक कहानी बनकर रह जाएगा। पर्यावरणविदों का भी यही मानना है कि हाथियों के इस महत्वपूर्ण गलियारे में पेड़ों की कटाई से न केवल वन्यजीवों का आवास प्रभावित होगा, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बढ़ेगा।
विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से मिट्टी के कटाव और भूजल स्तर पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्रख्यात पर्यावरणविद अनूप नौटियाल ने इसे विडंबना बताया कि एक ओर पौधारोपण के बड़े-बड़े आह्वान किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने जंगलों को काटा जा रहा है। विशेषज्ञों ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह जंगलों को न्यूनतम क्षति पहुंचाने के लिए वैकल्पिक मार्गों या आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों पर विचार करे।
एनएचएआई का बचाव
इस बीच, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस परियोजना का बचाव किया है। एनएचएआई के देहरादून परियोजना निदेशक सौरभ सिंह ने स्पष्ट किया कि सड़क के डिजाइन में पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है। उन्होंने बताया कि डब्लूडब्लूएफ-इंडिया और भारतीय वन्यजीव संस्थान के सुझावों के आधार पर हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अंडरपास और पुलिया जैसी वैज्ञानिक संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।
